Ankit Tripathi

हमारे देश में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो दूसरे धर्म के त्यौहारों को छोटा समझते हैं…चाहे वो जिस धर्म का त्यौहार हो ! शायद उनको ये नहीं पता या फिर शायद उन लोगों ने अपने धर्म ग्रंथों को ठीक न ही पढ़ा और न ही सुना या समझा है…! त्यौहार कभी किसी जाति, धर्म या किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं होता ! वो तो वैश्विक है… ऐसे लोग जो परधर्म को छोटा या…

"Ankit Tripathi"

लहू का रंग एक है – Sharda Mehta

“लहू का रंग एक है” वो दिवाली होली हमारे साथ मनाते है , कोई भी फर्क ना लगता है , जब हम मिल बैठ खाते हैं । आज ईद है ,आज हम सेवईंयां अपने दोस्त के घर खायेंगे , ईद की खुशियाँ मिलकर हम भी मनायेंगे । जो वतन से सियासत करते हैं , वो जानतें हैं क्या ? इन्सानियत होती है क्या ? प्यार मुहब्बत होता है क्या ? कितनी भी कोशिश कर ले…

"लहू का रंग एक है – Sharda Mehta"

Bharat Solanki

कई दिनो से मेरी जिन्दगी मुझसे है खफा मुझे मालूम नहीं क्यों जिन्दगी मुझसे है खफा फिर भी मैं बनके अनाड़ी खेल रहा हूँ खेल मेरे सामने वो खड़ा खिलाड़ी खेल रहा है खेल इतने दिनो से मैं चल रहा था दाव पर वो खुदा ऐसा चल रहा था दाव कि मैं चाहकर भी नही समझ पाया उसका दाव उत्तर में तो हाथ और दक्षिण में चला गया उसका पाव मैने देखे जिन्दगी के रंग…

"Bharat Solanki"

Sakshi Chauhan

दो वक़्त का खाना जुटाना जिनके लिए बड़ा मुश्किल होता है… चाहे जितनी कड़ी धूप हो या ठिठुरती ठंड, उनके पास रहने को घर कहाँ होता है… सपने तो ढेरों, आँखों मैं उनकी भी होते हैं, पर साकार करने का साधन , उनके पास कहाँ होता है… अपने बच्चों को अफ़सर बनाना वो भी चाहता है, पर उसका ये सपना सिर्फ़ सपना बनकर रह जाता है… कभी ढाबे में काम कर , कभी बड़े घरों…

"Sakshi Chauhan"

माँ

माँ तुमको शब्दों में पिरोना मुश्किल है। माँ तुमको कागज पर उतरना मुश्किल है। कैसे करूँ लफ़्ज़ों के दायरे में रहकर विस्तार तेरा, माँ लफ्ज़ों के परे भी , तेरा व्याख्यान हो पाना मुश्किल है। माँ तेरी ममता का अनुमान लगाना मुश्किल है। माँ लिखते ही मेरी कलम प्रणाम करती है, माँ तेरी शख्सियत का ओहदा बताना मुश्किल है। माँ तुम सत्य हो, माँ तुम ही एक वरदान हो, मां मेरे लिए तेरी विवेचना करना…

"माँ"

हाँ…! मैं गरीब हूँ – ( Atul Hindustani )

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"हाँ…! मैं गरीब हूँ – ( Atul Hindustani )"

Riya Swarnkar

लफ़्ज़ों में कुछ कह पाना उस रात में बेहद मुश्किल होगा, जब सदियो से भटकते मुसाफिर के सामने घूंघट में छिपा उसका कारवां होगा। बढ़ती धड़कने और माहौल में सन्नाटों का शोर होगा, जब झुकी हुई नजरों का उठना और क़यामत का गिरना होगा। कपकपाते हाथो से उसकी नरम हथेलियों का यूँ छूना होगा, तब अंदर उमड़ता तूफान और बाहर खामोशियों का नजारा होगा। कंगन, बेंदी,झुकमों का जब उसके बदन को अलविदा कहना होगा, सिरह…

"Riya Swarnkar"

Valentine in Metro – Manoguru

रोहित का,उसके गिरते हुए आंसुओं को देखते देखते ध्यान हाथों के मंजर पर पड़ा । अपनी उंगलियों से गुलाब की उन पंखुड़ियों को इस तरह मसल रही थी वो ,मानो आज का ये ज़ख्म गुलाब के ही काँटे ने दिया हो । खैर वो आज गुस्से में इतनी खोई हुई थी कि गुलाब तो कब का खाक हो चुका था अब तो वो अपनी उंगलियों का हाल बेहाल कर रही थी अंजाने में ही सही।…

"Valentine in Metro – Manoguru"

Monika Singh

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"Monika Singh"

इश्कबाज़ी

मज़हब को तलाशा तो क्या दे दिया इश्क़ के जैसे एक नशा दे दिया जख़्म ऐसा की जिसका न मरहम कोई दानिस्ता ये कैसा ज़हर दे दिया आयुष श्रीवास्तव बेमतलब इश्क़ की तलाश में दुनिया घूम रही हूँ मैं… और तुमसे बेवजह मोहब्बत कर रही हूँ मैं… अनुष्का वर्मा इश्क में जख्म तो मिलते ही है। जहां से हो मलहम की उम्मीद वो ही नमक छिड़कने लगते हैं मजहब की आड़ में सताये गये प्रेमी…

"इश्कबाज़ी"

The Unheard Voices (Mohammad Arshaan)

” THE UNHEARD VOICES ” Founder – Mohammad Arshaan Novel – Ishq In Aligarh  

"The Unheard Voices (Mohammad Arshaan)"