“नव्या” – एक खत तुम्हारे नाम end— मनोगुरू

तुम कब अपनी राह पर और मैं अपनी डगर चल दिya पता नहीं चल रहा था या मानो छुपाने की कोशिश कर रहा हूँ ।

आज मैं अपनी इस बे-जुबान कलम के साथ जो शायद तुमने थमा दी ,उतनी ही मुहब्बत करता हूँ जितना कि तुमसे पर फर्क है काफी कि ये तुम्हारी तरह सवाल जवाब नहीं करती । बस जो मन मैं आता है उसे बयान करती जाती है।

खैर वजहें काफी थी तो उन्हें जमींदोज ही रखना बेहतर समझता हूँ-“अरे वो इश्क भी क्या जो याद ना बन जाए” । आज भी तुम्हाri यादों ने जब इस वीरान मन में दस्तक दे ही दी ना जाने कहाँ से तो सहारा इस बे-जुबान का ले लिया । तुम्हें तो नहीं पर इसे हर पल सीने से ही लगाए रखता हूँ…. अरे छोटी सी है ना तभी

और इसकी कोई जाति या धर्म नहीं है तो ये हमारा कहा जाने वाला समाज कम ही टोक पाता है वरना कब का पाबंदी लगा चुका होता अपनी नासमझ और बेतुकी दलीलों से। अरे ये समाज तो बना ही है मजा लेने के लिए । मैं बात पर ही आ जाता हूँ ये तो मुझे भी गुमराह करने लगा

खैर मेैं कुछ आखिरी कहना चाह रहा हूँ कि आज भी कभी कभार कुछेक पानी की बूँद हाँ… हाँ पानी ही क्यूँकि जो बे-परवाह बहाया जा रहा है वो पानी ही है , और अब तुम्हारे ख्यालों के एवज में तो वाकई यही पानी जब कभी मेरे सीने पर गिर कर हर बार उस दफ्न इश्क के जख्मों को हरा सा कर देता है।

कमबख्त मेरे जज्बात भी – “अब बस करो कह रहे हैं” शायद कलम भी नम स्याही हो कर कागज को कुछ ज्यादा भिगो रही है । बस चलते चलते यह तो बताना भूल ही रहा हूँ कि आज मैं , मेरी कहानियाँ , कविता , शायरी सब कुछ काफी लोगों को पसंद भी आ रहा है जिन्हें कभी वक्त ही नहीं दे पाया और मेरी यही कलम वजह है इस पहचान की ।

शायद हर पल मरते दम तक साथ निभाएगी भी…… ये बे-जुबान शुक्रिया अदा करने को उतावली हो रही थी तुम्हारे साथ बीते उन पलों की नम स्याही भरकर लिखने को और इसकी जिद के आगे मेरे जज्बातों को झुकना ही पड़ा..।

बस कर रहा हूँ , ज्यादा हो रहा है फिर शायद तकलीफ हो इसलिए दुआ करता हूँ कि तुम जहाँ भी हो खुशियाँ कभी दामन ना छोड़ें जैसे कि ये कलम मेरा नहीं छोड़ती…….
जो चाहो वही तुम्हें मिले , कभी जुदा ना हो कुछ तुमसे ।

अपना ख्याल रखना……

तुम्हारा – “रमता जोगी”

“नव्या”- एक खत तुम्हारे नाम Part 2

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

11 thoughts on ““नव्या” – एक खत तुम्हारे नाम end— मनोगुरू

  1. Navya…..part 2 …after reading i felt whether i m the reader of speaker…..as being the reader i gradually went lost in the purity of confession of the emotions…it seems to have great touch of nostalgia…it may cause any reader to go back in the past fragrant reminiscence…..abhishek ji how u made use of this technique that resembles stream of consciousness frequently use in james joyce n lawrence novels….truely sensation of psychological staus of the character carved by u

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *