जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

"जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”"

Guard of reservation

आरक्षण का पहरेदार… मुझे ‘दलित’ मत कहो, मैं भी इन्सान ही हूं, इस छूत-पात में मत दाबो, मैं भी ‘ब्राम्हण’ सा हकदार हूं। पर क्या हुआ ग़र, मैं बुध्दिमान हूं, मुझे तो ‘आरक्षण’ दिलाओ, मैं छोटी ज़ात का हूं। सुनो, मुझे ‘नीच- जा़त’ मत कहना, मैं भी बराबर का, ओहदेदार हूं। क्या हुआ अगर, मेरे पास बंँगला भी है, गाड़ी भी है, मुझे ‘अल्प – संख्यक’ ही रहने दो, मैं तो संविधान की दया का…

"Guard of reservation"

I have seen the Burning India.

“हिंदुस्तान जलते देखा है” कहीं दुकानें , कहीं कारे , कहीं मकान जलते देखा है।। मैंने इन दंगों में हिंदुस्तान जलते देखा है ।। कहीं थी आग की लपटें , कहीं धुँआ धुँआ हो रखा था ,, बिलखते भूखे बच्चों ने , राशन गोदाम जलते देखा है ।। हर तरफ आग का पहरा था ,, हर तरफ खून के छिटे थे ,, मैने इंसानों की बस्ती को कब्रिस्तान बनते देखा है ,, कोई था खून…

"I have seen the Burning India."

मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant

Mahi IAS Aspirant खुद को खोकर मैने खुद को पाया है हालातों ने कभी पसीना तो कभी आँसू छलकाया है संघर्ष करना भी तो इस वक़्त ने मुझे सिखलाया है इस दिल को समझाया बहुत मैने कि कौन मुझे यहाँ समझ पाया है इस ज़िंदगी की धूप में तपकर ही मुझे लिखना आया है…. कभी कभी बहुत परेशान हो जाती हूँ मैं, जब जब लोगों की सोच में खुद को असमान पाती हूँ मैं… Mahi…

"मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant"