अंतर्विरोध कल और आज

अंतर्विरोध कल और आज – वीरू सिंह भारतीय समाज और राजनीति के तमाम अंतर्विरोध इस तरह पहले कब सतह पर तैरते दिखे थे, याद नहीं आता. भारतीय समाज के अंतर्विरोध पहली दफा तब दिखे थे जब मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने का सरकारी फैसला लिया गया था. लेकिन मंडल की वज़ह से समाज दो-फाड़ नहीं हुआ था. मंडल के समर्थन या विरोध में जो आन्दोलन हुए, वे भी अधिकांशतः शहरों तक ही सीमित…

"अंतर्विरोध कल और आज"

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पिताजी भारतीय सेना में थे और इसलिए अक्सर उनका हर दो या तीन साल में ट्रांसफर होता रहता था. यूँ तो पिताजी ने बहुत से ट्रांसफर देखे थे मगर वह पहला ट्रांसफर जो मुझे धुँधला धुँधला सा याद है सिलिगुरी से पचमढ़ी हुआ था. तब मैं कक्षा चार में था . वक़्त आ गया था जब हमने सामान पैक करना शुरू कर दिया . पिताजी के किट-बैग से लेकर बिस्तर-बंद तक सबकी पैकिंग मे बहुत…

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” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव

सुनो, अब इंतेज़ार नही है तुम्हारा क्योंकि कुछ वादे कर तुम भूल चुके हो इंतेज़ार, नही है अब तुमको अपनी बाहों में भरने का क्योंकि अब तक तो तुम किसी और कि बाहों में खुद को खो चुके हो इंतेज़ार, नही हूँ तुम्हारे दिन को खास बनाने का क्योंकि अब तुम उस दिन को किसी और के साथ ख़ास बनाते हो इंतेज़ार, नही है कि तुम मुझे मेरी जगह दो क्योंकि वो जगह तो टीम…

"” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव"

“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी

*शायद गलत हो तुम * * अगर तुम्हें लगता है कि – हर पल सिर्फ उसके बारे में सोचना ही मोहब्बत है – तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- सारी रात जग कर उससे बातें करना ही मोहब्बत है -तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- कि चंद बेवाक् कसमें और वादे कर देना ही मोहब्बत है – तो शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है…

"“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी"

सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है। रात में सबके बाद सोती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है। सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है। सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है। हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है। पापा की…

"सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार"

जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा

*जन्नत का इश्क़* जन्नत – बहुत सुंदर लड़की थी जो अभी 17 साल की थी .. उसका एक दोस्त था टेडी जिससे वो बात करती थी बड़ी ही अजब कहानी थी उसकी और उसके टेडी की । टेडी को प्यार से वो स्वीटू शोना बुलाती थी ये कहानी शुरू होती है जब जन्नत कुछ 17 साल की रही होगी उसके पापा एक मेले में जाते है उसे लेके बहुत अच्छे खिलोने व झूले देख कर…

"जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा"