Reservation in india

” सवर्ण विमर्श ” by Ajit Kumar Rai

मै वापस लेता हू अपने सारे बयान , जो दलितो के पक्ष मे सवर्णो के खिलाफ दिया था | मै पश्चात्ताप करता हू कि दलित , उत्पीडित और वंचितो की मदद करता रहा जीवन भर | ये दलित है ? दलित – उत्पीडन का अर्थ शीर्षासन कर गया है | भीम सेना ने आज देश – दहन किया , बाकायदा बुद्ध की मूर्ति के नीचे | क्या उन्हे इसका विलोम पता है ? मुझे लगता है कि हमारे पुरखे सही थे | ये इसी लायक थे | हमने इन्हे ज्यादा ही खोपडी पर चढ़| लिया | अब इन्हे गोद लेना बंद करो | अंबेडकर कोई भगवान नही थे कि उनका लिखा – लिखवाया वेद हो गया | और ये चर्मकार न तो अंबेडकर को मानते है और न सुप्रीम कोर्ट को | वरना दस या बीस साल मे आरक्षण खत्म हो गया होता | हर विभाग से सवर्ण खत्म होते जा रहे है और नपुन्सक सरकारे वोट बैङक के चक्कर मे आत्म – संहार किए जा रही है | सत्तर साल के बूढे को गोद लेना बंद करो | किन्तु मोदी ने तो रा ष्ट्रपति का पद ही आर क्षित कर दिया | आडवाणी , जोशी और यशवंत सि न्हा आदि को दरकिनार कर कोन सा एजेन्डा लागू कर रहे है ,? प्रणव मुखर्जी से योग्य कौन था ? ये देश भक्त उन्हे ही दूसरा मौका देदेते ! आरक्षण शायद स्किल डेवलपमेन्ट का उपकारक है | आरक्षण को हटाकर जनसंख्या – नियंत्रण की बाध्यकारी नीतियँ| दलितो और मुसलमानो के लिए भी लागू नही की गयी तो —- नामवर सिह ने गलती से एक सही बात लमही मे कहा था कि ब्राह्मण – ठाकुरो के लड़के कटोरा लेकर भीख मं|गने लगेगे | मुझे तो लगता है कि भीख मं|गने लगे है | सुदामा को तीनो लोक देकर आज कृष्ण खुद भिखारी होने की स्थिति मे पहुच गये है | नही , दानशीलता छोडो | अपना हक छीनना पडेगा | सहस्रबाहु की भुजाओ का छेदन करना ही होगा | बदलते समय – संदर्भो मे संविधान की समीक्षा करनी ही होगी | सबसे पहले अपने जयचंदो को पहचानो पृथ्वीराज ! शान्तिदूतो ने इतने श्वेत कबूतर उड़|ए कि आग लग गयी | जगदीश्वर चतु र्वेदी जैसे तमाम ‘ प्रगतिशील लेख को का हमे बहिष्कार करना होगा |ये सती सावित्री के साथ खडे महाप्रभु खुद को सा हित्य – जगत का ईश्वर समझते है | दलितो ने दलितो के सबसे बडे पक्षधर या पैरोकार प्रेम चंद की ‘ रंगभूमि ‘ की प्र तियँ| जलाई | ये मार्क्सवादी कठमुल्ले खुद को शायद प्रेम चंद से भी बड़| लेखक समझते है | दलितो ने लेखन मे अपनी अलग बस्ती बना ली या आर क्षित करा ली है | फिर भी ये थेथर (बेशर्म )उनके मुखापेक्षी बने रहते है | छोड़ दो चतु र्वेदी की उपा धि | वैसे भी वेदो को कहँ| मानते हो ? नही तो उठाओ अपना परशु और पौरुष का आश्रय लो | दलित और दलित जाति मे फर्क करना होगा | किन्तु ये तो दलित – साहचर्य मे ही अपनी सुरक्षा ढूढ़ते है , जैसे सा हित्य बाजार का हिस्सा होकर ही आज जीवित रह सकता है | उठो और कमर कसो कि आरक्षण को पूर्णत: खत्म किए बिना चैन नही लेगे | शिक्षा , चिकित्सा , इन्जीनियरिग और आई, ए. एस. मे ही नही , आरक्षण मुक्त भारत बनाएगे | पर यह काम गान्धीवादी तरीके से संगठित प्र तिरोध के द्वारा संपन्न होगा | बीस – पच्चीस साल पहले बी. बी. सी. लंदन से एक परिचर्चा प्र सारित हुई थी —- ‘ भारत के लिए लोकतंत्र वरदान या अभिशाप ? ‘ जहँ| एक व्यक्ति एक वोट के सिद्धान्त के अनुसार एक आई. ए. एस. के मत की उतनी ही कीमत है जितना एक अधपागल हलवाहे या चरवाहे की | इन विसंगतियो पर गहराई से सोचने की जरूरत है , चाहे सरकार रहे या चली जाय |सच पूछो तो आरक्षण तो कई बार दलितो के ही खिलाफ है | एक आर क्षित डाक्टर सरकारी अस्पताल मे सबसे अधिक जान किसकी लेगा ? अपने दलित भाइयो की ही न ! जो संपन्न है वे तो प्राइवेट अस्पतालो मे चले जाएगे |मै दलित – उत्पीड़न के पक्ष मे नही हू , पर दलित द्वारा पीडित होना असह्य है |

I’ll take back all my statements, which were given against the Savarano in favour of Dalits. I pashachatatap that the Dalit, the harassed and the nots have been helping me throughout life. Are these downtrodden? The meaning of Dalit and oppression is headstand. The Bhim Army made land-combustion today, beneath the Bakayada Buddha statue. Do they know the inverse of it? I think our ancestry were right. That was so worth it. We climbed the skulls. Took. Now stop adopting them. Ambedkar There was no God that wrote his Likhavaya and became the Vedas. And these tanners neither consider the Ambedkar nor to the Supreme Court. Otherwise the reservation would be over ten or twenty years. Every department is going to end gold and napunasak regimes are being self-destruct in the vote Bainak. Seventy years old, stop adopting. But Modi has damage the position of the raw shatarapati. Bypassing Advani, Joshi and Yashwant taking a shower, etc., are agenda to apply angle? Who was Pranav Mukherjee eligible? These country devotees dedete them only second chance! Reservations are probably a subfactor of skill development. Nitiya binding of population-controls by removing reservations. Not applicable to Dalits and Muslims,—-Namavar Singh accidentally said in Lamahi a right thing that the Brahmins and the boys of the thakurs were begging for a bowl. Gane. I think that begging. Gane is engaged. Sudama has reached out to the state of Krishna being a beggar by all three folk. No, quit generosity. Your right will be snatch. The arms of Sahasarabahu will have to be pierced. The Constitution has to be reviewed in changing times. Firstly identify your Jayachado Prithviraj! Shantiduto the White Pigeon. It took a fire. We have to boycott all the progressive articles like Jagdishwar Chatu Ravedi. These Satis mahaprabhu stand with Savitri, and they consider themselves a hitay-world God. The Dalits Tiya on the “amphitheatre” of the biggest underdog or purveyor Prem Chand. Lit | These Marxist kathamulales probably love Chand. The authors understand. The Dalits have made their separate townships in writing or R damage. Nevertheless, these thether (shameless) remain their mukhapekashi. Leave the Chatu ravedi UPA. Saying to the Vedas anyway. Do you believe? Otherwise, pick your halberd and Paurush’s shelter. Dalit and Dalit caste will do the difference.

BY -Ajit kumar rai

Writer’s Profile- https://www.facebook.com/ajit.kumarrai.92

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

2 thoughts on “Reservation in india

  1. मेरे पास शब्द नहीं है इस लेख की प्रशंशा करने के लिए (लाजवाब)

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