बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

माँ 
सुख हो या दुख, हर सांचे में, मिट्टी जैसी ढलती माँ
मैं तो अब तक जान न पाया, कब सोती कब जगती माँ

धन दौलत की खातिर बेटा, गाँव छोड़कर चला गया, 
अच्छे दिन की आशा पाले, रही स्वयं को ठगती माँ

दीवाली पर सजते देखे, घर आँगन चौबारे सब 
रहे भागती और दौड़ती, पता नहीं कब सजती माँ

बेटी और बहू की खातिर, जाने क्या क्या जोड़ रही, 
सपने बुनकर अलमारी में, कितने सारे रखती माँ

अपने घर के हर कोने का, दूर अँधेरा करने को, 
दीपक में बाती के जैसी, रही सदा ही जलती माँ

रचना – बसंत कुमार शर्मा, जबलपुर

 

जंगल में मंगल करे, खिलता हुआ पलाश |
खुशियाँ तेरे पास भी, भीतर जरा तलाश ||

रचना – बसंत कुमार शर्मा, जबलपुर

 

दूर खुशियाँ हो गयीं सब, साथ में गम रह गए
देख कर हालत हमारी, दोस्त भी कम रह गए 
जिन्दगी भर साथ देगा, कह रहा था जो मुझे 
भीड़ में गायब हुआ तो, ढूंढते हम रह गए

बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

 

पीर गले तक उफन रही है,
बिखर रहे हैं सपने सारे. 
टूट रहे तटबंध हृदय के,
संयम और वर्जना हारे.

सपने में आकाश तुम्हारा,
जाने क्या क्या रंग दिखाए
नींद खुली तो देखा हमने,
वहीं पड़े हैं आस लगाए.

होती गयी चदरिया छोटी,
जब-जब हमने पैर पसारे

पहुँची नागफनी जंगल से,
सत्ता के हर गलियारे तक.
सूरज ही बस पहुँच न पाया, 
गोवर्धन के चौबारे तक.

बुधिया तकता रहा खेत में, 
रोज गगन को साँझ-सकारे.

नदियों को पाबन्दी इतनी,
सागर से मिलने को डरतीं.
और कई तो डूब रेत में,
खत्म जिन्दगी अपनी करतीं.

यमुना सौंप चुकी दिल्ली को,
सारा पानी और किनारे.

बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

 

Follow writer’s writeups on Facebook profile –  बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

Author’s Profile : बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर (  https://www.facebook.com/basant5366  )

-all copyrights are reserved to the respected writer. Using any writeup without permission is highly prohibited.

Courtesy :” manoguru “(  https://www.facebook.com/abhishekmanoguru/ )

 

“नव्या”- एक खत तुम्हारे नाम part 1

 

काश…! कोई सुन लेता (part1)

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

One thought on “बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *