Akanksha Tanwar

सुबह विदा ले चुकी थी और तपती दोपहरी अपना आक्रोश दिखा रही थी। मन विचलित सा था और दिल हताश। बहुत जगह रिज्यूमे मेल कर चुकी थी, पर कही से कोई पॉजिटिव रिस्पांस आ ही नही रहा था, शायद किसी जॉब के लायक थी ही नहीं मैं। कोस रही थी बैठे-बैठे खुद को और ऊपरवाले को। शिकायतें कर रही थी भगवान से उनकी ही कि हे भगवान जी शायद कुछ जल्दी जल्दी में बना दिया…

"Akanksha Tanwar"

Value of Beauty

सुंदरता का मूल्य। ===========अति सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई। वह ‘सुंदर’ महिला एयरहोस्टेस से बोली “मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों…

"Value of Beauty"

भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ — Gopal Jha

एक मर्द के वजूद का कारण ही औरत होती हैं फिर भी वो कैसे मर्दो के लीये एक जिस्म भर होती हैं।। गर देखे कोई हमारी बहन को तो बुरा लगता हैं फिर क्यू दूसरे की बहनो को घूरना मज़ा लगता हैं।। क्यू भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ मैं भी किसी माँ का बेटा ही हूँ जिसने मुझे जन्म दिया।। साहब एक बात कहें चाहे वो मैं होऊ य़ा…

"भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ — Gopal Jha"

Ravan ko toh bematlab jalaya jata hai – Shruti Aggarwal

Ravan KO toh bematlab jalya jata h har Saal Socho usney sirf ek stri pr gandi nazar Dali thi …. sita ji KO Chua tak nhin tha , Ravan ko har varsh salon se saza milti AA rhi h ram ji ke vadh krny ke baad BHI kyun taki hamara samaz Yaad rakhey ki ek stri pr buri nazar dalny waly Ka kya harshye hota h toh fir kyun Nahin milti in darindo KO saza…

"Ravan ko toh bematlab jalaya jata hai – Shruti Aggarwal"

जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani

आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना। हर मोड़ पर ये कड़े इम्तहां क्यूं लेती है, हौसलें यूं बना ए मुसाफिर,,, ये अपनों के लिए अपनों से ही हरा देती है। जिद्द जो कर लो हर हालात से लडने की, ये जिन्दगी जीना सीखा देती है। कोई नहीं बदलता यहां किसी के लिए,,,, ठोकरें जो लगी, ये खुद को बदलना सीखा देती है। सच है… आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना… कभी…

"जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani"

Atul hindustani + Ayush Srivastava

वो शोहदों की छेड़छाड़ वो उनके बढ़ते अत्याचार कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलों ना कब तक सहूँगी मैं वो कांस्टेबल चाचा के सवाल फिर उनके बेबाक जवाब कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलो ना कब तक सहूँगी मैं वो मेरे कपड़ो पर अद्भुत विचार फिर क्यों गूंजती 7 साल की बच्ची की पुकार कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलो ना कब तक सहूँगी मैं वो चौराहों पर मोमबत्ती की दिवार मिडिया के बेवजह बहस…

"Atul hindustani + Ayush Srivastava"

“शायद तोहफा बेशकीमती है” – मनोकृति

“शायद तोहफा बेशकीमती है” – मनोकृति बात कुछ ऐसी है कि हर रोज की तरह मेरी पोस्ट को इंस्टाग्राम पर लाइक करने का सिलसिला दोहराया जा रहा था पर इस बार बेहद खास होने वाला था अभी तक वाकिफ नहीं था इस होने वाले वाक़िये से। तब तक एक अंजान सी लड़की ने मेरी सारी पोस्ट को एक बार में देखा और लाइक किया जिससे की नोटिफिकेशन में अब वही वही दिख रही थी। पता…

"“शायद तोहफा बेशकीमती है” – मनोकृति"

Dying’m too alive right now.

मरकर भी अभी जिंदा हूँ,पर थोड़ी शर्मिदा हूँ.. हवस मिटाने का तुमने , बस जरिया मुझे बना रखा है अब दुनिया वालो से कहते हो, की मैंने तुम्हे बचा रखा है। इन पापियों का मैं तो,अब बन चुकी एक धंधा हूँ मरकर भी ….. एक बार हरण-चीर होने पर भी , शोषण होता है मेरा मुंहबोला बाप भी देखो,अब तो मेरे संग सोता है अब तो अपने अरमानों का बना चुकी मैं फंदा हूँ। मरकर…

"Dying’m too alive right now."

Truth of your life by Ayushi Srivastava

“आज एक तोहफा चाहती हूँ” आज एक तोहफा चाहती हूँ प्यार नही ज़िन्दगी की सच्चाई चाहती हूँ तेरे सारे राज़ जानना चाहती हूँ तेरे दिमाग की उलझन को समझना चाहती हूँ हा आज मै ये तोहफा चाहती हूँ तेरी हँसी के पीछे का दर्द जानना चाहती हूँ तेरी खामोशी में छुपे हुए गुस्से का राज़ जानना चाहती हूँ हा आज मै ये तोहफा चाहती हूँ जानना चाहती हु तेरी ज़िन्दगी की सच्चाई को जानना चाहती…

"Truth of your life by Ayushi Srivastava"

Reservation in india

” सवर्ण विमर्श ” by Ajit Kumar Rai मै वापस लेता हू अपने सारे बयान , जो दलितो के पक्ष मे सवर्णो के खिलाफ दिया था | मै पश्चात्ताप करता हू कि दलित , उत्पीडित और वंचितो की मदद करता रहा जीवन भर | ये दलित है ? दलित – उत्पीडन का अर्थ शीर्षासन कर गया है | भीम सेना ने आज देश – दहन किया , बाकायदा बुद्ध की मूर्ति के नीचे | क्या…

"Reservation in india"

जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

"जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”"