Guard of reservation

आरक्षण का पहरेदार… मुझे ‘दलित’ मत कहो, मैं भी इन्सान ही हूं, इस छूत-पात में मत दाबो, मैं भी ‘ब्राम्हण’ सा हकदार हूं। पर क्या हुआ ग़र, मैं बुध्दिमान हूं, मुझे तो ‘आरक्षण’ दिलाओ, मैं छोटी ज़ात का हूं। सुनो, मुझे ‘नीच- जा़त’ मत कहना, मैं भी बराबर का, ओहदेदार हूं। क्या हुआ अगर, मेरे पास बंँगला भी है, गाड़ी भी है, मुझे ‘अल्प – संख्यक’ ही रहने दो, मैं तो संविधान की दया का…

"Guard of reservation"

I have seen the Burning India.

“हिंदुस्तान जलते देखा है” कहीं दुकानें , कहीं कारे , कहीं मकान जलते देखा है।। मैंने इन दंगों में हिंदुस्तान जलते देखा है ।। कहीं थी आग की लपटें , कहीं धुँआ धुँआ हो रखा था ,, बिलखते भूखे बच्चों ने , राशन गोदाम जलते देखा है ।। हर तरफ आग का पहरा था ,, हर तरफ खून के छिटे थे ,, मैने इंसानों की बस्ती को कब्रिस्तान बनते देखा है ,, कोई था खून…

"I have seen the Burning India."

मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant

Mahi IAS Aspirant खुद को खोकर मैने खुद को पाया है हालातों ने कभी पसीना तो कभी आँसू छलकाया है संघर्ष करना भी तो इस वक़्त ने मुझे सिखलाया है इस दिल को समझाया बहुत मैने कि कौन मुझे यहाँ समझ पाया है इस ज़िंदगी की धूप में तपकर ही मुझे लिखना आया है…. कभी कभी बहुत परेशान हो जाती हूँ मैं, जब जब लोगों की सोच में खुद को असमान पाती हूँ मैं… Mahi…

"मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant"

|| राम जन्म ।। – कार्य नंद पाठक (लेखक)

|| राम जन्म ।। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, आज मन में साध है, रामजन्म की कथा, कहकर सुनाऊं आपको। त्रेता में हम जनमे नहीं, आँखों देखा हाल यह। मानस में हमने जो पढ़ी, हम आप से जो कुछ सुनी, वर्णन वही करना यहां। महीना चैत का ही था, समशीतोष्ण वातावरण था, भूमि सुवासित थी। महलों से निकली,,,,, सोहरों की स्वर लहरियाँ, मन को भी हरने लगी। जो जहाँ था, व्यस्त था, फुरसत में था एको नहीं। खुशियाँ किसे…

"|| राम जन्म ।। – कार्य नंद पाठक (लेखक)"

Journey of life

मैं एक लेखक नहीं एक कलाकार हूँ छोटी-बड़ी गलतियों को माफ़ करने से पहले बताना जरूरत, मुझे सुधारने का एक मौका देना जरूर। ज़िन्दगी एक नए जंग हैं, हर सफ़र मुश्किलें अनंत हैं। चलते-चलते लगखड़ाते हुए संभाल लेंगे हम,किस्मत को थोड़ा आजमा लेंगे हम। मुश्किलें भी देंगी साथ मेरा हँसते हुए,वो मुझे गिराए हर दफ़ा संभलने के लिए। उसकी हँसी को दुःख में बदल देंगे ,गिरते हुए हम थोड़ा मुस्कुरा देंगे। चोट तो युही लगती…

"Journey of life"

Death diaries 11 – Philomina Neerudu

Death diaries 11 You are a wave My life dries to drown I have touched the petals of death Mere of death. These pages bloom my shore Like diving words , ready To root out the muses of Catastrophe. Writer – Philomina Neerudu Can you tell me, How to rest those Velvet words skimmed On those shady clouds? They rupture my dreams When you bring those Rusty fears in my dirty eyes Would you promise…

"Death diaries 11 – Philomina Neerudu"

किसान और किसान में कितना अंतर होता है – चिराग गुमसुम

किसान और किसान में कितना अंतर होता है आप ये भी देखिए। कितना अनुशासन था। आप सबने भी तो देखा ना। एक तरफ वो दक्षिण भारत के किसान और एक तरफ ये हमारे उतर भारत के जमींदार जो अपने आपको किसान कहते है। सड़कें रोक दी, वाहनों को चलने नहीं दिया। हिंसा और आगजनी कर दी। 30 हजार कोई कम संख्‍या नहीं होती साहब। मजाल है कोई अप्रिय घटना हिंसा या उत्‍पात हो जाए। किसान…

"किसान और किसान में कितना अंतर होता है – चिराग गुमसुम"

” Mr. Irritating ” – Nilesh Sharma

एक गुज़ारिश – Nilesh Sharma (Mr. Irrirating) महान व्यक्तियों, बुद्धजीवियों, बड़े लोगों, स्वैग वाले भाइयों आपसे गुज़ारिश है अगर आपके पास एक हारा, दुर्दुराया हुआ लड़का या कोई ऐसा इंसान आता है जिसके सपने अंदर ही अंदर उफ़ान मार रहे हों, जो भले ही बोलने में हिचकिचाये, डरे, और किसी तरह आत्मविश्वास की गठरी बांध कर आपसे कुछ सुझाव मांगे तो उसे उसकी उम्र, उसकी बेबसी और उसकी नाकामयाबियों के बारे में अपना ब्रह्माज्ञान ना…

"” Mr. Irritating ” – Nilesh Sharma"

“The Battle” – Devansh Arora

“The Battle” – Devansh Arora The sun was up, She looked so messed up. Yet so beautiful to him, He looked deep into those eyes as if in those, he wanted to swim. She just nonchalantly smiled while they wished each other morning, None of them even had a clue what new storm was aborning. Like every usual day they started to get ready for work, They have fought many battles to be together but…

"“The Battle” – Devansh Arora"

तू इतना खुश कैसे है..? – दुष्यंत प्रबल तिवारी

तू इतना खुश कैसे है, इतना खुश भी कोई होता हैं क्या ? आँसू भी खुशियों के आते, सच बतला कोई धोखा है क्या ? सब के सब , सारे के सारे तारीफ तेरी क्यूँ करते है, सारी कमियाँ छिपलाने वाला, कोई तेरे पास मुखोटा है क्या ? और ग़म को दिल में जगह नहीं हैं, तो मेरी सारी खुशियाँ रख ले , रो-रो के दिल भर लेती हैं , इतना दिल तेरा छोटा हैं…

"तू इतना खुश कैसे है..? – दुष्यंत प्रबल तिवारी"

Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “

चलने लगी है हवाएँ, सागर भी लहराये ——————————————————————– अभिजीत से हमारा राब्ता इसी गाने से हुआ था । उस दौर में एल्बम का बङा क्रेज़ था और उसमें अभिजीत सबसे फिट बैठते थे । इस गाने को हमने सीडी पर तब देखा था जब हमारे बङे भाई लोंगो के किताबों में रवीना , ऐश्वर्या, माधुरी राज करती थी । और अपने क्रश को वे लोग मोटे – मोटे किताबों के बीचों बीच दबा के रखते…

"Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “"