तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा

हम उनके लौटने की राह रोज देखते रहे , जिंदगी के स्वप्न को यूँ रोज भूलते रहे … भूल वो गए मुझे तो क्या नई ये बात है , हम तो अब भी गीत में उन्हें ही ढालते रहे … आज फिर वो खुश हुए जो हम उन्हें यूँ दिख गए , याद फिर वही किया जहां थे हम अटक गये … वो आज पूछने लगी कि हाल कैसा है मेरा , कि पूछने लगी…

"तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा"

सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा

कितना मुश्किल है सत्य की राह पर आगे बढ़ना… झूठ आवाजें देता है बार बार पुकारता है पूरी शिद्दत से कि कमजोर पड़ जाओ तुम बस मुड़कर देखो तुम प्रतीक्षा करता है उस एक पल की जब भावनाओं का प्रबल प्रवाह क्षीण कर दे तुम्हारी इच्छाशक्ति और तुम पलट कर एक दृष्टि झूठ पर डालो उसी एक क्षीण क्षण में जकड़ लेता है तुम्हें संवेदनाओं का एक जाल भ्रमित करता है तुम्हें अपनी सम्मोहन शक्ति…

"सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा"

” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव

सुनो, अब इंतेज़ार नही है तुम्हारा क्योंकि कुछ वादे कर तुम भूल चुके हो इंतेज़ार, नही है अब तुमको अपनी बाहों में भरने का क्योंकि अब तक तो तुम किसी और कि बाहों में खुद को खो चुके हो इंतेज़ार, नही हूँ तुम्हारे दिन को खास बनाने का क्योंकि अब तुम उस दिन को किसी और के साथ ख़ास बनाते हो इंतेज़ार, नही है कि तुम मुझे मेरी जगह दो क्योंकि वो जगह तो टीम…

"” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव"

“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी

*शायद गलत हो तुम * * अगर तुम्हें लगता है कि – हर पल सिर्फ उसके बारे में सोचना ही मोहब्बत है – तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- सारी रात जग कर उससे बातें करना ही मोहब्बत है -तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- कि चंद बेवाक् कसमें और वादे कर देना ही मोहब्बत है – तो शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है…

"“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी"

सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है। रात में सबके बाद सोती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है। सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है। सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है। हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है। पापा की…

"सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार"

Sakshi Chauhan

दो वक़्त का खाना जुटाना जिनके लिए बड़ा मुश्किल होता है… चाहे जितनी कड़ी धूप हो या ठिठुरती ठंड, उनके पास रहने को घर कहाँ होता है… सपने तो ढेरों, आँखों मैं उनकी भी होते हैं, पर साकार करने का साधन , उनके पास कहाँ होता है… अपने बच्चों को अफ़सर बनाना वो भी चाहता है, पर उसका ये सपना सिर्फ़ सपना बनकर रह जाता है… कभी ढाबे में काम कर , कभी बड़े घरों…

"Sakshi Chauhan"

माँ

माँ तुमको शब्दों में पिरोना मुश्किल है। माँ तुमको कागज पर उतरना मुश्किल है। कैसे करूँ लफ़्ज़ों के दायरे में रहकर विस्तार तेरा, माँ लफ्ज़ों के परे भी , तेरा व्याख्यान हो पाना मुश्किल है। माँ तेरी ममता का अनुमान लगाना मुश्किल है। माँ लिखते ही मेरी कलम प्रणाम करती है, माँ तेरी शख्सियत का ओहदा बताना मुश्किल है। माँ तुम सत्य हो, माँ तुम ही एक वरदान हो, मां मेरे लिए तेरी विवेचना करना…

"माँ"

हाँ…! मैं गरीब हूँ – ( Atul Hindustani )

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"हाँ…! मैं गरीब हूँ – ( Atul Hindustani )"

Riya Swarnkar

लफ़्ज़ों में कुछ कह पाना उस रात में बेहद मुश्किल होगा, जब सदियो से भटकते मुसाफिर के सामने घूंघट में छिपा उसका कारवां होगा। बढ़ती धड़कने और माहौल में सन्नाटों का शोर होगा, जब झुकी हुई नजरों का उठना और क़यामत का गिरना होगा। कपकपाते हाथो से उसकी नरम हथेलियों का यूँ छूना होगा, तब अंदर उमड़ता तूफान और बाहर खामोशियों का नजारा होगा। कंगन, बेंदी,झुकमों का जब उसके बदन को अलविदा कहना होगा, सिरह…

"Riya Swarnkar"

Happy Mothers Day (Sandhya Mishra)

Sandhya Mishra 2nd runnerup of Happy Mother’s Day Writing Contest organized by The_Unheard_Voices Sandhya Mishra :- All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly Prohibited.  The Unheard Voices Fb Page link – https://www.facebook.com/The-Unheard-Voices-364470227361462/

"Happy Mothers Day (Sandhya Mishra)"

Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)

Harshit kushwaha जब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मैं अपने शहर से दूसरे शहर गया था। जहां पर मुझे कॉलेज के छात्रावास में ही रहना पड़ता था।  बात उस वक्त की है जब मैं दिसंबर के महीने में भयंकर ठंड पड़ने के कारण रात के तकरीबन 2 बजे मुझे बहुत तेज बुखार था।हालांकि जवानी के सारे अच्छे दोस्त मेरे करीब ही थे । पर फिर भी दोस्त सिर्फ दोस्त ही होते हैं।  उस वक्त…

"Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)"