“मेरी प्यारी गौरैया” ~~( राघव शंकर )~~

मेरी प्यारी गौरैया!   जब मैं भरी दोपहर में स्कूल से लौट कर घर आता,तो बाहर लगे नल को चला कर हाथ पैर धोता और फिर वहीं लगे नींबू के पेड़ के नीचे जो कि ज्यादा फल आने से झुक गया था और एक छतरी के जैसा बन गया था, उसी के नीचे दादा जी के आराम करने के लिए पड़ी खाट पर लेट जाता थोड़ी देर आराम करने के लिए। पेड़ के नीचे की…

"“मेरी प्यारी गौरैया” ~~( राघव शंकर )~~"

Kingfisher And Wild life Photography

एक दिलचस्प वाक़िआ- __________________ किंगफ़िशर नाम की इस चिड़िया का यह परफ़ेक्ट शॉट लिया है वाइल्ड लाइफ़ फोटो ग्राफर ‘एलन मॅक फ़ेडिन’ ने. जी किंगफ़िशर वही किंगफ़िशर जिसकी तस्वीर आपने बियर की बोतल और हवाई जहाज़ में बनी देखी होगी. वही किंगफ़िशर जिसका मालिक देश को चकमा देकर लगभग नौ हज़ार करोड़ रुपये लूट के भाग गया. दरअस्ल ये चिड़िया भी विजय माल्या की ही तरह चालाक और शातिर है. किंगफ़िशर लगभग गोली की रफ़्तार…

"Kingfisher And Wild life Photography"

“मनोगुरू”आ गया है

सोचता हूँ कि लिखना बन्द कर दूँ….. खुश मत हो मनोगुरू लिखेगा……हाँ लिखेगा.. कल जब दिखूँ कहीं मशहूर लेखकों की फेहरिस्त में तो ये मत कहना कि – “मुझे तो पता था कि वो लेखक बनेगा”। खैर कह देना कोई फर्क नहीं पड़ता अब क्यूँकि “समाज” को बचपन से “समझ” लिया है। मजा ही लेता है वो अपना कहा जाने वाला -“समाज” अरे कुछ को अंग्रेजी आती है ना तो उनको अवगत करा दूँ कि…

"“मनोगुरू”आ गया है"

“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव” सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है…. जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है….. आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…… अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है….. तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है…. खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है …. सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है , बैर…

"“जल का तांडव”- मनोगुरू"

“आस्था की अफीम” — मनोगुरू

कमी न थी , पर कमीन निकले जमीन थी , संग जमीर निगले आशाराम भी संग रामपाल, बदनाम राम रहीम निकले लग्जरी गाड़ियाँ , बहुतायत जमीन इन्सान हूँ खुद को कहते रहीम अन्जान ही लेते आस्था की अफीम हैवानी नियत , रॉकिंग जोग लिबास रग-रग बसता , शॉकिंग भोग विलास छोड़ दो जाना , इनकी दुकान ना हैं सन्यासी , ना हैं इन्सान बंद होगा हर दिन , इनका बाजार घाटे में होगा , उनका…

"“आस्था की अफीम” — मनोगुरू"

“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू

माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं अरमान देख उनके, सब कुछ लुटा दिया, सम्मान देखा उनका , ये सर ही झुका दिया… देखा जो गिरते उनको , हाथों से उठा दिया कोई कभी माँ-बाप ना उनका, कहकर रुला दिया अब हम उम्र की दहलीज पर, तो ख्यालों से गिरा दिया अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ ↑….↓ + kavyana (Anamika) कम्बख्त वक्त का रुख देखो , बिन आस के हम जीते देखो…. हर साँस में बसता “वो” अब…

"“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू"

What is “Life” ? By “मनोगुरू”

Life :- whole process of living is called ‘Life’. जीवन :- जीवित रहने की प्रक्रिया ही ‘जीवन’ है । Process :- जरूरी नहीं कि हमेशा खुशियाँ ही किसी के साथ रहें या सिर्फ दुख-दर्द ही । सिक्के की तरह ही सुख-दुख भी जीवन के दो पहलू हैं बशर्ते कौन सा पल किसके साथ कितने दिन तक रह सके , यह कहा नहीं जा सकता । आपका वर्तमान क्या है इस बात से तो आप भली-भाँति…

"What is “Life” ? By “मनोगुरू”"

“वो गरीब की झोपड़ी” – मनोगुरु

शहर के एक कोने में कदमों के पास लेकिन नजरों से कोसों दूर गरीबी की धुंध में दबी सी, शायद तभी दिन हो या रात वहाँ मंजर समान ही रहता है । मगर इंसान की हसरत की तरह उसकी फितरत जो नहीं बदलती है । जहाँ शोरगुल का माहौल होते हुए भी शोर ही गुल था , शायद शोर भी उस दहलीज तक पहुँचते ही दम सा तोड़ देता हो। वहाँ से शहर और वो…

"“वो गरीब की झोपड़ी” – मनोगुरु"

वो आज भी जिंदा हैं…- manoguru

उस गाँव में वो हरे-भरे पेड़ , चहचहाते पक्षी , कोलाहल करती कहीं बच्चों तो कहीं युवाओं की टोलियाँ , वहीं नुक्कड़ पर बुजुर्गों की गपशप वाली चर्चाएँ तो कहीं खेत की ओर जाते किसान… और भी बहुत कुछ मानो संसार का हर द्रश्य एक ही जगह बसता हो । कढी़ मेहनत और उम्मीद का दामन थामे हर परिवार खुशियों से जीवन व्यतीत कर रहा था। क्यूँकि यहाँ ना तो वो शहर वाली पानी की…

"वो आज भी जिंदा हैं…- manoguru"