मेरे पास उत्तर है – मनोगुरु

मेरे पास आज भी हर , प्रश्न का उत्तर था जब अपनों ने किया प्रश्न उस प्रश्न का भी उत्तर था फिर मन ये क्यूँ निरुत्तर था जब पास मेरे उत्तर था उनकी नजर होता जवाब जो उचित उत्तर था वो प्रश्न का प्रत्युत्तर था पर वक़्त का रुख था ही ऐसा बेहतर ही था जो निरुत्तर था मेरे पास आज भी हर प्रश्न का उत्तर था पर आज ना मैं , निरूत्तर हूँ Writer…

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“शेर-ए-बेरुखी” – मनोगुरू

“खुदाई” खुद को खुदा समझा इस कदर, खुद-ब-खुद गुनाह कर बैठे… खुद से ही खफा ‘वो’ अब ऐसे, खुदगर्ज को वफा जो समझ बैठे… रोते अब यूँ वो ख्वाबों में भी, ख्वाबों में खता जो कर बैठे… खुद को ही जुदा जो कर बैठे, क्यूँ खुद को “खुदा” समझ बैठे..? – मनोगुरू “शेर-ए-बेरुखी” “वो” उनकी आशिकी में इस कदर मशहूर थे बेशक, मगर उस बेरुखी को अब तलक भूले नहीं शायद…. -मनोगुरू तुम्हें दिल में…

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सुनो बे-जुबान बोलती जो — मनोगुरू

सुनो ! “शायरी”भी बोलती है… हस्ती है ‘वो’ ऐसी , खुद को ही कोसती जो बन शायरी मैं ‘उसकी’ ,हर दर्द सोखती जो हाँ मैं शायरी हूँ ऐसी , हर राज खोलती जो जहाँ एक ओर दुनिया,बस पीर फेंकती हो जो साबुत है सुकून से ,वही वीर देखती जो एहसास करो तुम भी , बे-जुबान बोलती जो माना सुना ना तुमने,कोई शायरी बोलती हो मैं शायर ‘मनोगुरू’की,शायरी हूँ बोलती जो….. ↑अभिषेक ‘मनोगुरू’ यूँ देखकर उस…

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मनोगुरू की बे-जुबान शायरी…..part 1

हकीकत कहूँ तो बेहतर है , तेरा साथ ना होना..वरना कौन मुसाफिर बन काफिर, ले कलम कलमकारी करता ↑अभिषेक ‘मनोगुरू’ (@dark days diary) ‘वो’ कहती थी कि , हर पल साथ निभाऊँगी ‘मैं’ तभी समझा कि, दुनिया वाकई फरेबी है.. ↑अभिषेक ‘मनोगुरू’ (@dark days diary) कौन कम्बख्त कह गया कि, इश्क अन्धा होता है… यहाँ तो जाम-ए-इश्क में भी दो बूँद मजहब डला है… ↑अभिषेक ‘मनोगुरू’ (@dark days diary) खोजने में यूँ मुझे , फिर…

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