तुम ऐैसे कैसे भगवान ?

तुम ऐैसे कैसे भगवान ? भक्त जो आस्था से, आते तुम्हारे द्वार । देखने ,सूनने कोई चमत्कार । देखने कोई साक्षात्कार । तेरा रूप देखकर होते धन्य । चरणस्पर्श कर,कमाते पूण्य । हम भी मानते है भगवान । लेकिन, तेरे रूप में घुम रहे, धरती पर कई इन्सान । जो बन बैठें है भगवान । और हम नादान, ,मानते है उन्हें भगवान । उनकी दुनिया है नीराली । सब कष्ट,दुःख,समस्या का समाधान। उनका अपना है,अद्भूत…

"तुम ऐैसे कैसे भगवान ?"

“मरी हुई व्यवस्था” by Devansh Bharadwaj

“मरी हुई व्यवस्था” बच्चा ढूँढ कर मुझे, मेरे पास आता है मेरे कान में वो कुछ बताता है मैं सुनते ही थोड़ा सकपकाता हूँ पुलिस चौकी की ओर भागता हूँ इंस्पेक्टर को ढूंढता हूँ सारी बातें बोलता हूँ। किसी लड़की की इज्ज़त खतरे में है दरिन्दा जा पहुंचा उसके चबूतरे में है चबूतरे से कमरे की थोड़ी ही दूरी है साहब लड़की की इज्ज़त बचाना बहुत जरूरी है। वो कान में ऊँगली डालता हैं मेरी…

"“मरी हुई व्यवस्था” by Devansh Bharadwaj"

वो ग़जल और हम – Rahul kumar

फिर सहेलियों संग खेला करती मैं, ज़ख्म भर जाते ग़र दुवा करती मैं। शायद इस लिए सांसे छीन ली मेरी, जिंदा रहती तो दर्द बयां करती मैं। ……………………….rahul kumar ख़ल रही है अब ये गुमानी मुझको, अच्छे लोगो से है परेशानी मुझको। मैं ता-उम्र बच्चा रहना चाहता हूँ, जवां रखती है ये नादानी मुझको। वो अपने ख़ताओ से हैरान नही है, तो इसी बात की है हैरानी मुझको।अब कोई ज़हर असर नही करता, मार रही…

"वो ग़जल और हम – Rahul kumar"

शायर वरुण आनन्द

यूं अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम सुलगती रेत पे ऊँगली से पानी लिख रहे थे हम یوں اپنی پیاس کی خود ہی کہانی لکھ رہے تھے ہم سلگتی ریت پہ انگلی سے پانی لکھ رہے تھے ہم मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई जहाँ पर ज़िन्दगानी ज़िन्दगानी लिख रहे थे हम میاں بس موت ہی سچ ہے وہاں یہ لکھ گیا کوئ جہاں بس زندگانی…

"शायर वरुण आनन्द"

पत्थर में भगवान कहां…..?

पत्थर में भगवान कहां…..? मूक मूर्ति है मंदिर में, पत्थर में भगवान कहां। पत्थर दिल ये लोग हो गए, लोगों में इंसान कहां। मेरा धर्म मैं खुद देखूंगा, मत धर्म के ठेकेदार बनो। आखिर किस धर्म ने कहा, मासूमों पे अत्याचार करो। बेटी सी फूल सी बच्ची वो, तेरे हाथ ज़रा भी कांपे न। आंसू, दर्द, चीख-पुकार, गुहार को सुन तू भांपे न। क्या बीत रही होगी उसपे, क्या बीतेगी परिवार पे अब। क्या हवस…

"पत्थर में भगवान कहां…..?"

“मुद्दों की कमी नहीं देश में”

मुद्दों की कमी नहीं है हमारे देश में, देखिये हैवानियत घूम रही है किस किस वेश में कभी मुद्दा होता है आरक्षण का कभी किसी बेटी के भक्षण का, कभी सड़कें जलती हैं, कभी मोमबत्तिया पिघलती हैं, कोई कभी दंगा करता है, कोई इंसानियत को नंगा करता है, नेता भाषण बाचते हैं, विधायक खुले आम नाचते हैं जेल में मौत हो जाती है , एक बेबस लाचार पिता की क्या किसी ने सुनी चीख़ें ,…

"“मुद्दों की कमी नहीं देश में”"

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! मंदिर जैसी पवित्र जगह को अपने इरादे की तरह नापाक कर दिया !! क्या तुम्हें पता भी तुम लोगो ने क्या पाप कर दिया !! एक बच्ची का इंसानियत से तुमने भरोसा उठा दिया !! हम सबका सिर शर्म से तुमने झुका दिया !! पापी बाहर घूम रहे सब कर रहे बस निंदा हैं ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग…

"ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan"

भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ — Gopal Jha

एक मर्द के वजूद का कारण ही औरत होती हैं फिर भी वो कैसे मर्दो के लीये एक जिस्म भर होती हैं।। गर देखे कोई हमारी बहन को तो बुरा लगता हैं फिर क्यू दूसरे की बहनो को घूरना मज़ा लगता हैं।। क्यू भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ मैं भी किसी माँ का बेटा ही हूँ जिसने मुझे जन्म दिया।। साहब एक बात कहें चाहे वो मैं होऊ य़ा…

"भूल जाता हूँ की मैं भी एक बहन का भाई हूँ — Gopal Jha"

जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani

आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना। हर मोड़ पर ये कड़े इम्तहां क्यूं लेती है, हौसलें यूं बना ए मुसाफिर,,, ये अपनों के लिए अपनों से ही हरा देती है। जिद्द जो कर लो हर हालात से लडने की, ये जिन्दगी जीना सीखा देती है। कोई नहीं बदलता यहां किसी के लिए,,,, ठोकरें जो लगी, ये खुद को बदलना सीखा देती है। सच है… आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना… कभी…

"जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani"

Atul hindustani + Ayush Srivastava

वो शोहदों की छेड़छाड़ वो उनके बढ़ते अत्याचार कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलों ना कब तक सहूँगी मैं वो कांस्टेबल चाचा के सवाल फिर उनके बेबाक जवाब कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलो ना कब तक सहूँगी मैं वो मेरे कपड़ो पर अद्भुत विचार फिर क्यों गूंजती 7 साल की बच्ची की पुकार कब तक सहूँगी मैं बोलो बोलो ना कब तक सहूँगी मैं वो चौराहों पर मोमबत्ती की दिवार मिडिया के बेवजह बहस…

"Atul hindustani + Ayush Srivastava"