◆◆★ अनजाना दर्द ★◆◆केशव पाल

◆◆★ अनजाना दर्द ★◆◆ खुशियां ही ढुढ़ता रहा ताउम्र……. सपने ही संजोता रहा, दिल मे………………………….. यकीन न हुआ,न खुद पर………. न हाथों की लकीरों पर…………. समेटता रहा कुछ खुशियां……… जो इर्द-गिर्द बिखरी पड़ी थी……. हर सपने रखा सहेजकर……….. यादों की झोली मे………………. जो मैंने उस रात देखे थे…………  टुटी हुई ख्वाब मे……………….. देखा था वो भी जो लिखा था…… नसीब मे………………………… रास न आयी ये जिंदगी…………. कुछ भी न लगा हाथ……………. एक-एक कर सब छोड़ते…

"◆◆★ अनजाना दर्द ★◆◆केशव पाल"

Panjab Singh Saini

Maaf krna aaj story bdii ho gyii prr apko ykiin dilata Hu aapko bhut achii lgegi … mujhe aaj zana thaa too Papa hmesa kii trha mere Jane se 30 minutes phle guest room me akele baithe hue thee👤…Orr mummy mere liye Khana bna rhii thii🍝🍜🍝🍲… Mai phli Baar Jo bhut durr ja RHA thaa🚶🚶🚶……Mai Papa Se Milne gya Orr Papa ke hmesa kii trha kuch question same thee🙆🙆 ..bss kuch question ko chorrkr kii Apne…

"Panjab Singh Saini"

“यूं ही नहीं निकलते आंसू” – मीरा श्रीवास्तव (गुरू माँ)

यूं ही नहीं निकलते आंसू यूं ही नहीं टपकते आंसू। जब अपने धोखा देते हैं दिल पर चोट पहुंचाते हैं पीठ में खंजर घोप देते हैं , विश्वास तोड़ देते हैं जब होंठ कुछ नहीं कह पाते हैं तब अन्तर मन रो देता है , दिल से आह निकलती है तब दिल की पीड़ा ही आंसू बन बहने लगती हैं जो अपनापन रखतें हैं नम आंखों को पढ़ लेते हैं सारा दर्द समझ लेते हैं…

"“यूं ही नहीं निकलते आंसू” – मीरा श्रीवास्तव (गुरू माँ)"

”बेटी के पति को हम बचायेंगे”- डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव

  “बेटी नहीं बेटी के पति को हम बचायेंगे” 8 अप्रैल की रात्री में हम बिस्तर को धाये। धाते ही हम निद्रा देवी की गोद में समाये।। एक पहलवान लेकर सोटा हमारी ओर आये। देख उनकी भाव भंगिमा हम बहुत घबराये।। तान के सोटा बहुत क्रोध में मुझसे वह बोले। आया तेरा अंतिम समय, नाम राम का लेले।। करबध्द हो मैं बोला, श्रीमान यों न गुर्राईये । जानता नहीं मैं आपको, मेरा दोष तो बताईये।।…

"”बेटी के पति को हम बचायेंगे”- डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव"

Dying’m too alive right now.

मरकर भी अभी जिंदा हूँ,पर थोड़ी शर्मिदा हूँ.. हवस मिटाने का तुमने , बस जरिया मुझे बना रखा है अब दुनिया वालो से कहते हो, की मैंने तुम्हे बचा रखा है। इन पापियों का मैं तो,अब बन चुकी एक धंधा हूँ मरकर भी ….. एक बार हरण-चीर होने पर भी , शोषण होता है मेरा मुंहबोला बाप भी देखो,अब तो मेरे संग सोता है अब तो अपने अरमानों का बना चुकी मैं फंदा हूँ। मरकर…

"Dying’m too alive right now."

Truth of your life by Ayushi Srivastava

“आज एक तोहफा चाहती हूँ” आज एक तोहफा चाहती हूँ प्यार नही ज़िन्दगी की सच्चाई चाहती हूँ तेरे सारे राज़ जानना चाहती हूँ तेरे दिमाग की उलझन को समझना चाहती हूँ हा आज मै ये तोहफा चाहती हूँ तेरी हँसी के पीछे का दर्द जानना चाहती हूँ तेरी खामोशी में छुपे हुए गुस्से का राज़ जानना चाहती हूँ हा आज मै ये तोहफा चाहती हूँ जानना चाहती हु तेरी ज़िन्दगी की सच्चाई को जानना चाहती…

"Truth of your life by Ayushi Srivastava"

Reservation in india

” सवर्ण विमर्श ” by Ajit Kumar Rai मै वापस लेता हू अपने सारे बयान , जो दलितो के पक्ष मे सवर्णो के खिलाफ दिया था | मै पश्चात्ताप करता हू कि दलित , उत्पीडित और वंचितो की मदद करता रहा जीवन भर | ये दलित है ? दलित – उत्पीडन का अर्थ शीर्षासन कर गया है | भीम सेना ने आज देश – दहन किया , बाकायदा बुद्ध की मूर्ति के नीचे | क्या…

"Reservation in india"

जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

"जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”"

Guard of reservation

आरक्षण का पहरेदार… मुझे ‘दलित’ मत कहो, मैं भी इन्सान ही हूं, इस छूत-पात में मत दाबो, मैं भी ‘ब्राम्हण’ सा हकदार हूं। पर क्या हुआ ग़र, मैं बुध्दिमान हूं, मुझे तो ‘आरक्षण’ दिलाओ, मैं छोटी ज़ात का हूं। सुनो, मुझे ‘नीच- जा़त’ मत कहना, मैं भी बराबर का, ओहदेदार हूं। क्या हुआ अगर, मेरे पास बंँगला भी है, गाड़ी भी है, मुझे ‘अल्प – संख्यक’ ही रहने दो, मैं तो संविधान की दया का…

"Guard of reservation"

I have seen the Burning India.

“हिंदुस्तान जलते देखा है” कहीं दुकानें , कहीं कारे , कहीं मकान जलते देखा है।। मैंने इन दंगों में हिंदुस्तान जलते देखा है ।। कहीं थी आग की लपटें , कहीं धुँआ धुँआ हो रखा था ,, बिलखते भूखे बच्चों ने , राशन गोदाम जलते देखा है ।। हर तरफ आग का पहरा था ,, हर तरफ खून के छिटे थे ,, मैने इंसानों की बस्ती को कब्रिस्तान बनते देखा है ,, कोई था खून…

"I have seen the Burning India."

मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant

Mahi IAS Aspirant खुद को खोकर मैने खुद को पाया है हालातों ने कभी पसीना तो कभी आँसू छलकाया है संघर्ष करना भी तो इस वक़्त ने मुझे सिखलाया है इस दिल को समझाया बहुत मैने कि कौन मुझे यहाँ समझ पाया है इस ज़िंदगी की धूप में तपकर ही मुझे लिखना आया है…. कभी कभी बहुत परेशान हो जाती हूँ मैं, जब जब लोगों की सोच में खुद को असमान पाती हूँ मैं… Mahi…

"मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant"