”अल्फाज़ो की दुकान” (अतुल हिन्दुस्तानी)

“बिटिया” ममता का भव सागर होती हैं बिटिया, कुछ अनमोल जेवरों की मोती हैं बिटिया छोड़ घर बाबुल का कुछ अनजान बन, दूसरे बाबुल का घर बनती हैं बिटिया तमाम रंग महोब्बत के ज़रूर हैं मगर, प्यार का एक रूप बताती हैं बिटिया बेटे ही नहीं सपनों के बुनकर, आज तो सपनों को भी सॅवारती हैं बिटिया पूजते तो खूब हम सब कन्याओं को, पर क्यों किसी कोख में रोती हैं बिटिया अतुल हिंदुस्तानी (@अल्फ़ाज़ों…

"”अल्फाज़ो की दुकान” (अतुल हिन्दुस्तानी)"

नज़्म औ गजल (रजत मिश्रा )

कभी तारों सा तू जल, कभी रातों को जला, कभी दुनिया पे भी हंस, कभी दुनिया को हंसा, तू पहलू में बिठा, ज़रा ला के ज़िंदगी, कुछ किस्से उसके तू, फिर उसको ही सुना, कभी बहरा बन के सुन, कभी गूंगा बन के गा, जो भी मांगे ज़िंदगी, तू इसके पास ला, ज़रा जीना आसां कर, ज़रा मसलों को बढ़ा, तू उधारी की भी पी, तू उधार भी पिला, अभी दोनो साथ हैं, कुछ सांसें…

"नज़्म औ गजल (रजत मिश्रा )"

फिर भी दहेज जरूरी है (शैलेन्द्र वर्मा)

उम्र गुजारी हमने बेटी का दहेज जुटाने में, ये कमर झुकती गई बच्चो को पढ़ाने मे। ……. एक एक दिन गुजरता वेतन के इंतजार मे, चप्पल घिस गयी जी.पी,एफ निकालने मे। ……. सरकारी कर्मचारी सेहरा मक्कारी का सर पे हे…, किसे बताएँ क्या सहा भष्टाचार से दामन बचाने मे ……. आधी पगार तो इ.एम.आई मे चली जाती हे यारो, झुरिया चेहरे पे आई खिचतान के घर चलाने मे…। …….. रोज़ डाँट सुनते बोस कि लेट दफ्तर…

"फिर भी दहेज जरूरी है (शैलेन्द्र वर्मा)"

“इंसानियत खो चुकी है” (अशोक मिश्रा)

नफरतभरी इस आँधी में इंसानियत खोने लगी। इंसान को इंसान से ही ईर्ष्या होने लगी। जाति, भाषा और मजहब पर सियासत हो रही। सत्ता सुख की भूख से आत्मा सियासी रो रही । भूख से लालच बढा ईमान पर भारी पड़ा। भरने लगा अन्याय, अत्याचार, पापों से घड़ा। तब उस सियासत से रियासत दिन दूनी होने लगी। इंसान को इंसान से ही ईर्ष्या होने लगी ।। आज सरहद पर समस्या बद से बदतर हो रही।…

"“इंसानियत खो चुकी है” (अशोक मिश्रा)"

“वो आवाज कुछ खास थी”

मनोगुरू हर वक्त खुद को खुशनसीब समझता है जब रोज किसी नए हुनर औ जुनून से रूबरू होता है । आज यही नजरें बस वही हुनरबाज को तलाशती हुई गुजर रही थी कि दिल को एक आवाज सुनाई दी, सुनता तो बहुत कुछ हूँ पर आज कुछ खास सा लगा तो फिर से सुना तुम्हें……अरे हाँ तुम ही जो हो तो हूबहू हमारी ही तरह पर ये आवाज तुम्हें खास बना रही है । अब…

"“वो आवाज कुछ खास थी”"

हाँ मैं “अशांत” हूँ……(इंदौर)

जिसे दुत्कार खुद से मिल रहा क्या आस औरों की , झुका जब शीश ही , औकात क्या है शेष पैरों की , बड़ी उलझन भरी है ज़िंदगी , उसकी कहानी भी , न अपनों ने मुझे समझा , करूँ क्या बात गैरों की ! अशांत . (इंदौर ) भरे उत्साह में अर्थी बड़ी गमगीन लगती है , बिना अपराध की कोई सजा संगीन लगती है , भले हो दिन उजाले से भरा पर कुछ…

"हाँ मैं “अशांत” हूँ……(इंदौर)"

” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )

“परम सत्य” उस एक परम सत्य ने , हमेशा से सबको छला है । वो मृत्यु है , कर देता है चेतनाशून्य , सक्रिय शरीर को । बिना किसी आहट के, सेंध लगा जाता है इस शरीर में । खींच ले जाता है प्राण वायु , निस्पंद कर जाता है, इस काया को । निर्जीव कर जाता है । पूर्ण विस्राम दे जाता है । छोङ जाता है मिट्टी का काया , मिला देने के…

"” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )"

वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)

सज़ा ए ज़ीस्त बढाने का काम करते हैं जो मेरी जान बचाने का काम करते हैं سزا ئے زیست بڑھانے کا کام کرتے ھیں جو میری جان بچانے کا کام کرتے ھیں हमारा नाता है उस क़ैस के घराने से कि हम भी ख़ाक उड़ाने का काम करते हैं ہمارا ناتا ھے اس قیس کے گھرانے سے کہ ہم بھی خاک اڑانے کا کام کرتے ھیں हमारी आँख के अश्कों को रायेगाँ न समझ ये…

"वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)"

talents of manoguru family list 1

‎अभिषेक ‘मनोगुरू’‎ to Manoguru family   तुमसे पहली मुलाकात कानपुर में पढ़ाई के दौरान 2011 में हुई, और तब से लेकर आज तक गहरा रिश्ता है तुमसे शायद एक ही जुनून भी वजह है । बस यूँ ही कलम की शान बनाए रखना….. Manoguru family तुम्हारे हुनर को सलाम करती है Talent : writing (poem, shayri nd specially social writeups).. अतुल हिंदुस्तानी “अल्फाजों की दुकान” . 2.adesh jain https://www.facebook.com/thealmawriter/ तुम उन खास शख्सों में से…

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