हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद

ये शोखियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम, तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम, रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम हमारी आँख में पैवस्त एक सहरा है, अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम हर एक लफ्ज़ का मअनी तलाशते हो तुम, हर एक लफ्ज़ का मअनी कहाँ से लाएँ हम चलो बता दें जमाने को अपने बारे में, कि हर रोज…

"हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद"

Manoguru

ये खुमार-ए-इश्क है साहब…! अब शायद ना बीमारी जाएगी, कहते हो…! तो करता हूँ चैन से करार पर वक्त रहते बेकरारी तो जाएगी हूँ जमीं पे, तब तलक शायरबाजी ही भाएगी :- All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly prohibited.

"Manoguru"

वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)

सज़ा ए ज़ीस्त बढाने का काम करते हैं जो मेरी जान बचाने का काम करते हैं سزا ئے زیست بڑھانے کا کام کرتے ھیں جو میری جان بچانے کا کام کرتے ھیں हमारा नाता है उस क़ैस के घराने से कि हम भी ख़ाक उड़ाने का काम करते हैं ہمارا ناتا ھے اس قیس کے گھرانے سے کہ ہم بھی خاک اڑانے کا کام کرتے ھیں हमारी आँख के अश्कों को रायेगाँ न समझ ये…

"वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

महफिल – ए – शायरी ( 2 )

– मनोगुरू + Shailendra verma(Shayar) Shailendr verma (शायर) ↓ अाते आते आएगा दिल को करार जाते जाते ही बेकरारी जाएगी मनोगुरू(Dark.Days.Diary) ↓ ये खुमार-ए-इश्क है साहब…! अब शायद ना बीमारी जाएगी, कहते हो…! तो करता हूँ चैन से करार पर वक्त रहते बेकरारी तो जाएगी हूँ जमीं पे, तब तलक शायरबाजी ही भाएगी   – मनोगुरू + @sakshi jain @Sakshi jain ↓ तूफान है मेरे अन्दर , बुझने दूँ कैसे भला….. + मनोगुरू @dark days…

"महफिल – ए – शायरी ( 2 )"

“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू

गिन मत कदम मंजिल से पहले, वो खुद शुमार होंगे तेरी जश्न-ए-फतह में…. -अभिषेक “मनोगुरू” Collab with = Shiwam pathaur + Sharda Khakre + मनोगुरू (Dark Days Diary)…… on your quote app. वो चिराग दीपक समझ , बुझता सा दिख रहा है पर वो सिरफिरा बेफिक्र हो, तकदीर लिख रहा है… अभिषेक “मनोगुरू” थी हमारी भी तमन्ना आसमान छूने की, पर काट लोगों ने ज़मीन में दफ़नाया अतुल हिन्दुस्तानी जो कर प्रयास बेधुंध आसमां छू…

"“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू"

महफिल – ए – शायरी ( 1 )

नीलू @The sapphire30 ↓ काश तू मेरी आँखों का आँसू बन जाए तुझे खोने के डर से मैं रोना छोड़ दूँगी + अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ @dark days diary ↓ माना कि तेरी आँखों का आँसू बन जाऊँ, पर डर है कहीं बन आँसू ही ना बह जाऊँ…..   @kish mehra ↓ क्या खूब दिल छलनी करते हैं शायर महबूब के पहले इश्क के शेर…. + @dark days diary ↓ माना दिल छलनी करते हैं, महबूब…

"महफिल – ए – शायरी ( 1 )"