जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा

*जन्नत का इश्क़* जन्नत – बहुत सुंदर लड़की थी जो अभी 17 साल की थी .. उसका एक दोस्त था टेडी जिससे वो बात करती थी बड़ी ही अजब कहानी थी उसकी और उसके टेडी की । टेडी को प्यार से वो स्वीटू शोना बुलाती थी ये कहानी शुरू होती है जब जन्नत कुछ 17 साल की रही होगी उसके पापा एक मेले में जाते है उसे लेके बहुत अच्छे खिलोने व झूले देख कर…

"जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा"

लहू का रंग एक है – Sharda Mehta

“लहू का रंग एक है” वो दिवाली होली हमारे साथ मनाते है , कोई भी फर्क ना लगता है , जब हम मिल बैठ खाते हैं । आज ईद है ,आज हम सेवईंयां अपने दोस्त के घर खायेंगे , ईद की खुशियाँ मिलकर हम भी मनायेंगे । जो वतन से सियासत करते हैं , वो जानतें हैं क्या ? इन्सानियत होती है क्या ? प्यार मुहब्बत होता है क्या ? कितनी भी कोशिश कर ले…

"लहू का रंग एक है – Sharda Mehta"

Bharat Solanki

कई दिनो से मेरी जिन्दगी मुझसे है खफा मुझे मालूम नहीं क्यों जिन्दगी मुझसे है खफा फिर भी मैं बनके अनाड़ी खेल रहा हूँ खेल मेरे सामने वो खड़ा खिलाड़ी खेल रहा है खेल इतने दिनो से मैं चल रहा था दाव पर वो खुदा ऐसा चल रहा था दाव कि मैं चाहकर भी नही समझ पाया उसका दाव उत्तर में तो हाथ और दक्षिण में चला गया उसका पाव मैने देखे जिन्दगी के रंग…

"Bharat Solanki"

Valentine in Metro – Manoguru

रोहित का,उसके गिरते हुए आंसुओं को देखते देखते ध्यान हाथों के मंजर पर पड़ा । अपनी उंगलियों से गुलाब की उन पंखुड़ियों को इस तरह मसल रही थी वो ,मानो आज का ये ज़ख्म गुलाब के ही काँटे ने दिया हो । खैर वो आज गुस्से में इतनी खोई हुई थी कि गुलाब तो कब का खाक हो चुका था अब तो वो अपनी उंगलियों का हाल बेहाल कर रही थी अंजाने में ही सही।…

"Valentine in Metro – Manoguru"

इश्कबाज़ी

मज़हब को तलाशा तो क्या दे दिया इश्क़ के जैसे एक नशा दे दिया जख़्म ऐसा की जिसका न मरहम कोई दानिस्ता ये कैसा ज़हर दे दिया आयुष श्रीवास्तव बेमतलब इश्क़ की तलाश में दुनिया घूम रही हूँ मैं… और तुमसे बेवजह मोहब्बत कर रही हूँ मैं… अनुष्का वर्मा इश्क में जख्म तो मिलते ही है। जहां से हो मलहम की उम्मीद वो ही नमक छिड़कने लगते हैं मजहब की आड़ में सताये गये प्रेमी…

"इश्कबाज़ी"

Happy Mothers Day (Tanu Awasthi)

Writing competition on Mother’s day Entry No 27 Tanu मां की आकृति छाया मैंने पाई, सूरज ढला तो चादर पिता ने लाई। मां से मैं आज हूं, पिता के सिर का ताज हूं। मां के वचन है अनमोल, उसमें शरबत का है घोल। पिता के वचन साहस बढ़ाते हैं, आगे बढ़ना वो हमें सिखाते हैं। मां यदि है दर्पण तो , पिता द्वारा है सबकुछ अर्पण। मां के द्वारा यदि सृष्टि का संचार है, तो…

"Happy Mothers Day (Tanu Awasthi)"

Happy Mothers Day (Juhi Singh Chauhan)

वो बड़े प्यार से नौ महीने अपनी कोख में तुझे रखती है वो एक मां है जो हजार दर्द सह कर भी तुझे पैदा करती है। जब तुम चलना भी नहीं जानते थे तो तुम्हारे डगमगाते कदमों से कदम मिला कर चलती है  वो एक मां है जो तुम्हे इस जमीन पर सीधा खड़ा होना सिखाती है। एक हल्की सी खरोंच पर भी तुम्हारी जो तड़प सी उठती है वो एक मां है जो तुम्हारे…

"Happy Mothers Day (Juhi Singh Chauhan)"

Juhi Singh Chauhan

सिर से लेके पांव तक बस तुझसे बंधी हूँ मैं, कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं… यूं तो रीति रिवाज में ज्यादा नहीं पड़ती पर बात तेरी लम्बी उम्र की है इसलिए माथे पर अपने ये लाल रंग बड़े प्यार से सजाती हूँ मैं कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं नहीं फर्क पड़ता मुझे गर हाथो में चूड़ियां ना पहनूँ मैं पर बात…

"Juhi Singh Chauhan"

बलात्कार जारी है ….

सो रहा हूँ,सोने दो, नहीं कोई आवाज़ दो, घर मेरा अभी महफूज हैं, चैन से मुझे रहने दो, फर्क नहीं पड़ता कुछ, जो रहा है सो होने दो, फर्क अभी पडेगा भी नहीं, जब तक काल दस्तक देगा नहीं, सियासत के आँच में घर जलेगा नहीं, धर्म और जाति पर तू बँटेगा नहीं, तब तुम्हें भी चिल्लाना पडेगा, इंसाफ के लिये दर-दर भटकना पडे़गा, तुम्हारे दर्द के साथ बेदर्दी से खेला जाएगा, धर्म और जाति…

"बलात्कार जारी है …."

Modernisation

“रोटी” माथे पर, कड़क तडपता सूरज। बदन की करता लाही । सूलगे हुए सपने संग, झूलसाती गर्मी में । हवा के झोके से, मिले हल्का सूकुन । फटा हुवा गमछा , पोछता सारा पसीना । छिटक कर हाथ से, माथे की बूंदे । देखता एक बार, सूरज की ओर । फिर, पेड़ के निचे बैठकर । एक मजदुर, खाता है रोटी, तोड़कर एक एक कौर । प्रदीप सहारे लोधिवली-पनवेल “अाधुनिकता” आधुनिकता के मोह में, एैसे…

"Modernisation"

“उम्मीद अभी बाकी है” – (Prajjval Nira Mishra + Azharuddin Siddiqui)

कुछ उम्मीद है जो अभी बाकी है। कुछ चाह है जो अभी बाकी है। तन जल चुका है मेरा। पर वजूद है जो अभी बाकी है। मेरे सपने अब भी वंही हैं। वो परियों का दुनिया भी अभी ज़िंदा है। मेरी सूरत मिटी है तेरी कायरता से। पर हौंसला है जो अभी बाकी है। मेरे जिस्म पर फेंका था तेजाब तुमने। पर सुकून है कि मेरे बदन को तुमने छुआ ना था। सिर्फ तेजाब ने…

"“उम्मीद अभी बाकी है” – (Prajjval Nira Mishra + Azharuddin Siddiqui)"