Death diaries 11 – Philomina Neerudu

Death diaries 11 You are a wave My life dries to drown I have touched the petals of death Mere of death. These pages bloom my shore Like diving words , ready To root out the muses of Catastrophe. Writer – Philomina Neerudu Can you tell me, How to rest those Velvet words skimmed On those shady clouds? They rupture my dreams When you bring those Rusty fears in my dirty eyes Would you promise…

"Death diaries 11 – Philomina Neerudu"

” Mr. Irritating ” – Nilesh Sharma

एक गुज़ारिश – Nilesh Sharma (Mr. Irrirating) महान व्यक्तियों, बुद्धजीवियों, बड़े लोगों, स्वैग वाले भाइयों आपसे गुज़ारिश है अगर आपके पास एक हारा, दुर्दुराया हुआ लड़का या कोई ऐसा इंसान आता है जिसके सपने अंदर ही अंदर उफ़ान मार रहे हों, जो भले ही बोलने में हिचकिचाये, डरे, और किसी तरह आत्मविश्वास की गठरी बांध कर आपसे कुछ सुझाव मांगे तो उसे उसकी उम्र, उसकी बेबसी और उसकी नाकामयाबियों के बारे में अपना ब्रह्माज्ञान ना…

"” Mr. Irritating ” – Nilesh Sharma"

तू इतना खुश कैसे है..? – दुष्यंत प्रबल तिवारी

तू इतना खुश कैसे है, इतना खुश भी कोई होता हैं क्या ? आँसू भी खुशियों के आते, सच बतला कोई धोखा है क्या ? सब के सब , सारे के सारे तारीफ तेरी क्यूँ करते है, सारी कमियाँ छिपलाने वाला, कोई तेरे पास मुखोटा है क्या ? और ग़म को दिल में जगह नहीं हैं, तो मेरी सारी खुशियाँ रख ले , रो-रो के दिल भर लेती हैं , इतना दिल तेरा छोटा हैं…

"तू इतना खुश कैसे है..? – दुष्यंत प्रबल तिवारी"

Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “

चलने लगी है हवाएँ, सागर भी लहराये ——————————————————————– अभिजीत से हमारा राब्ता इसी गाने से हुआ था । उस दौर में एल्बम का बङा क्रेज़ था और उसमें अभिजीत सबसे फिट बैठते थे । इस गाने को हमने सीडी पर तब देखा था जब हमारे बङे भाई लोंगो के किताबों में रवीना , ऐश्वर्या, माधुरी राज करती थी । और अपने क्रश को वे लोग मोटे – मोटे किताबों के बीचों बीच दबा के रखते…

"Change of image’s season -” Sourabh Shandilya “"

“One dream it was…” by Mohit Sharma

A mask of a mask , a face of a face An angel dancing with the demon’s grace On the song of god , sung by sinners Chasing the losers , denying the winners Aah ! you wonderful face of pride You fighter unknown , you wings of flight Betray ! Betray ! This world insane , Let’s restart this senseless game……! Mohit Sharma One dream it was… just a little dream Of having a…

"“One dream it was…” by Mohit Sharma"

गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)

प्यार करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं सबको अपना समझना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं अपनों पर विश्वास करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मै अपनो से अपने पन की प्यार मोहब्बत की छोटी छोटी खुशियों की चाहत रखना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं, गुनाहों की सज़ा अपने ही मुझे खूब दे रहे हैं हम जिनसे करते हैं प्यार हमें नज़र अंदाज़ कर रहे हैं, नफ़रत के नश्तर हर पल चुभो रहें…

"गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)"

●मै नारी हूं● ( केशव पाल )

*●मै नारी हूं●* हर जुर्म सहती हूं। फिर भी न कुछ कहती हूं। मत बांधों बेड़ियों मे,अकेले ही चलने दो। होके उन्मुक्त मुझे भी जीने दो।। संघर्ष करती जिंदगी से,मै वो नारी हूं। हरदम जीती हूं, कभी नहीं हारी हूं। चहारदीवारी की जंजीरें, अब तो तोड़ने दो। होके उन्मुक्त मुझे भी जीने दो। मत सोचो कमजोर हूं, इतिहास बदल सकती हूं। जिस दिन तोड़ दूंगी, खामोशी अपनी धरती क्या आकाश बदल सकती हूं। कब तक…

"●मै नारी हूं● ( केशव पाल )"

Havoc of humanity in Syria

ज़ालिमों का कहर देखो सीरिया मे इंसानियत का हशर देखो सीरिया मे ظالموں کا قہر دیکھوسیریامیں انسانیت کا حشر دیکھو سیریا میں ये बमबारी ये चीख़ें ये लाशों का ढेर तबाही का मंजर देखो सीरिया मे یہ بمباری یہ چیخیں یہ لاشوں کا ڈھیر تباہی کا منظر دیکھو سیریا میں लोग कहते हैं कयामत आने वाली है कयामत का असर देखो सीरिया मे لوگ کہتے ہیں قیامت آنے والی ہے قیامت کا اثر دیکھو سیریا…

"Havoc of humanity in Syria"

बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर

माँ  सुख हो या दुख, हर सांचे में, मिट्टी जैसी ढलती माँ मैं तो अब तक जान न पाया, कब सोती कब जगती माँ धन दौलत की खातिर बेटा, गाँव छोड़कर चला गया,  अच्छे दिन की आशा पाले, रही स्वयं को ठगती माँ दीवाली पर सजते देखे, घर आँगन चौबारे सब  रहे भागती और दौड़ती, पता नहीं कब सजती माँ बेटी और बहू की खातिर, जाने क्या क्या जोड़ रही,  सपने बुनकर अलमारी में, कितने…

"बसंत कुमार शर्मा , जबलपुर"

— विदाई —(दिनकर राव दिनकर)

— विदाई — बेटियाँ धन पराया मैं कैसे कहूँ गम जुदाई का बेटी मैं कैसे सहूँ फिक्र तेरी है मुझको तू सुन लाड़ली मैं सजाता हूँ रश्मों की इक पालकी है रिवाजों की दुनिया निभाना तुझे जाके ससुराल तू भूल जाना मुझे गुड्डे गुड़िया भी ले जा खिलौने तेरे ले जा यादों के बचपन सलोने तेरे माँ सिसकती है तू देख ले भर नज़र छूटता जा रहा आज बाबुल का घर देख भाई बिछड़ता हुआ…

"— विदाई —(दिनकर राव दिनकर)"

महफिल – ए – शायरी ( 2 )

– मनोगुरू + Shailendra verma(Shayar) Shailendr verma (शायर) ↓ अाते आते आएगा दिल को करार जाते जाते ही बेकरारी जाएगी मनोगुरू(Dark.Days.Diary) ↓ ये खुमार-ए-इश्क है साहब…! अब शायद ना बीमारी जाएगी, कहते हो…! तो करता हूँ चैन से करार पर वक्त रहते बेकरारी तो जाएगी हूँ जमीं पे, तब तलक शायरबाजी ही भाएगी   – मनोगुरू + @sakshi jain @Sakshi jain ↓ तूफान है मेरे अन्दर , बुझने दूँ कैसे भला….. + मनोगुरू @dark days…

"महफिल – ए – शायरी ( 2 )"