“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव” सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है…. जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है….. आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…… अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है….. तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है…. खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है …. सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है , बैर…

"“जल का तांडव”- मनोगुरू"

“नव्या” – एक खत तुम्हारे नाम end— मनोगुरू

तुम कब अपनी राह पर और मैं अपनी डगर चल दिya पता नहीं चल रहा था या मानो छुपाने की कोशिश कर रहा हूँ । आज मैं अपनी इस बे-जुबान कलम के साथ जो शायद तुमने थमा दी ,उतनी ही मुहब्बत करता हूँ जितना कि तुमसे पर फर्क है काफी कि ये तुम्हारी तरह सवाल जवाब नहीं करती । बस जो मन मैं आता है उसे बयान करती जाती है। खैर वजहें काफी थी तो…

"“नव्या” – एक खत तुम्हारे नाम end— मनोगुरू"

talents of manoguru family list 1

‎अभिषेक ‘मनोगुरू’‎ to Manoguru family   तुमसे पहली मुलाकात कानपुर में पढ़ाई के दौरान 2011 में हुई, और तब से लेकर आज तक गहरा रिश्ता है तुमसे शायद एक ही जुनून भी वजह है । बस यूँ ही कलम की शान बनाए रखना….. Manoguru family तुम्हारे हुनर को सलाम करती है Talent : writing (poem, shayri nd specially social writeups).. अतुल हिंदुस्तानी “अल्फाजों की दुकान” . 2.adesh jain https://www.facebook.com/thealmawriter/ तुम उन खास शख्सों में से…

"talents of manoguru family list 1"

“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू

माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं अरमान देख उनके, सब कुछ लुटा दिया, सम्मान देखा उनका , ये सर ही झुका दिया… देखा जो गिरते उनको , हाथों से उठा दिया कोई कभी माँ-बाप ना उनका, कहकर रुला दिया अब हम उम्र की दहलीज पर, तो ख्यालों से गिरा दिया अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ ↑….↓ + kavyana (Anamika) कम्बख्त वक्त का रुख देखो , बिन आस के हम जीते देखो…. हर साँस में बसता “वो” अब…

"“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू"

वो आज भी जिंदा हैं…- manoguru

उस गाँव में वो हरे-भरे पेड़ , चहचहाते पक्षी , कोलाहल करती कहीं बच्चों तो कहीं युवाओं की टोलियाँ , वहीं नुक्कड़ पर बुजुर्गों की गपशप वाली चर्चाएँ तो कहीं खेत की ओर जाते किसान… और भी बहुत कुछ मानो संसार का हर द्रश्य एक ही जगह बसता हो । कढी़ मेहनत और उम्मीद का दामन थामे हर परिवार खुशियों से जीवन व्यतीत कर रहा था। क्यूँकि यहाँ ना तो वो शहर वाली पानी की…

"वो आज भी जिंदा हैं…- manoguru"