“काश…! कोई सुन लेता ” by मनोगुरू

ये देखो कोई मेरे लिए लिख रहा है , और मैं हूँ कि उसे देख ही नहीं पा रही कि आखिर मुझे लिखने वाला दिखता कैसा है।

अरे…! तुमने भी नहीं पहचाना ? अरे मैं तो माँ की कोख में हूँ अभी इसीलिए किसी को नहीं देख पा रही । कोई बात नहीं , कुछ दिनों की ही बात है फिर कोख से बाहर आकर देखूंगी कि कैसी है ये बाहर की दुनिया और मेरे अपने लोग।

शायद माँ की कोख की तरह ही होगी , लेकिन बाहर से तो कई सारी आवाजें सुनाई देती हैं , तो फिर काफी बड़ी होगी । अरे अब भला मैं कैसे देख सकती हूँ यहाँ तो अपनी छोटी-छोटी आँखों को बन्द जो किए रहती हूँ ना तभी सिर्फ एक ही रंग का पता है मुझे । शायद बाहर काफी कुछ रंगीन होगा

और माँ तो साथ होगी ही , फिर तो बाहर भी महफूज रहूँगी मैं । कोख में हूँ तो चलो यहीं बहुत से सपने सजा लेती हूँ , अरे… बाहर आकर नाम भी तो रोशन करूँगी परिवार और देश का भी ।

वैसे मेरी भी कई सारी ख्वाहिशें हैं लेकिन सबसे पहले तो माँ को ही निहारूँगी क्योंकि वही तो है जो मुझे इतनी हिफाजत से आसरा दिए हुए हैं ।

मुझे भी ना बहुत सारी बातें करनी हैं , बस बाहर आ जाऊँ जल्दी से अब सब्र नहीं होता लेकिन

… कभी कभार मुझे सुनाई देने वाली वो बाहरी दुनिया की आवाजें कुछ अजीब सी लगती हैं , पता नहीं क्यूँ पर फिर भी कभी कभी ऐसा अहसास होने लगता है कि जैसे मैं बाहर कुछ लोगों को बे-वजह खटक रही हूँ …

हो सकता है उनकी कुछ अलग सोच हो या खुद के लिहाज से बेहतर नजरिया भी , लेकिन उनकी आवाजों से मेरी मासूमियत ना चाहते हुए भी सहम सी रही है , डर जाती हूँ कभी-कभी । अरे यह क्या मैं सो रही थी सहमी ही सही मगर सुकून की नींद पर कुछ चुभन सी महसूस हुई मुझे ।

जैसे किसी ने मेरे कोमल मुलायम से शरीर में नुकीला सा कुछ चुभाया हो । पता नहीं क्यूँ माँ कुछ कह नहीं रही , दर्द हो रहा है अब मानो कोई जान बूझकर खींच रहा हो……..कोई कह दो ना…..

शेष अगले भाग में…..→→→

“काश कोई सुन लेता” part2

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

17 thoughts on ““काश…! कोई सुन लेता ” by मनोगुरू

    1. The theme dealt by the author is in itself very appealing which directly inters to the bossom.but the way with which it had been presented seems to have the touch of margaret attwood…it is realky afresh n interesting to read…heartiest congratulation to have touched this theme in a quite satiric style which is mild n provocative

      1. thanks a lot …. readers like as you is the main part of my aim to spreading humanity, an keep suggesting nd support. thanks again for read feel and appreciations….keep connected

    2. Speechless… अच्छा लगता है कि लोग सामाजिक समस्या, संकीर्ण सोच पर लिखते हैं , परन्तु लोगों में बदलाव आये उसका इंतजार है। आज यह समस्या कम पढे लिखे, किसी गाँव के समाज से नहीं बल्कि पढे लिखे शहर के समाज से जादा बढ रही है।

  1. सर आपने उस हर एक बेजुबा मासूम बच्ची, जो अपनी माँ की कोख में ही दम तोड़ देती है और बंद आँखो से जो सपने वो देखती है पर कुछ लोगों की गलत सोच के कारण वो अपना ही जीवन खो देती है, इस दुनिया में आ ही नहीं पाती.. आपने बहुत ही सरलता और खूबसूरती से उसे बया किया है यहां..
    उम्मीद है आपके इस लेख के जरिये उन अजन्मे बच्चे की अवाज काश.. कोई सुन ले |

    नमन 🙏 है सर आपको जो आप उन लोगों में शामिल नहीं जो बेटियो को बोझ समझते हैं ..
    और आशा करती हूँ लोगों की सोच बदलेगी,
    और बेटियो को दुनिया में आने से पहले ही मारा नहीं जायेगा..

    और आपसे ही प्रेरित होकर मेरी कुछ पंक्तियां उन अजन्मी बच्चियो के लिये.. थोड़ा ज्यादा लिख दिया तो गलतियों के लिए माफ़ी चाहती हूँ.. 🙏

    शायद वो जी जाती,
    तो भी खुद को बेहद अकेला ही पाती..
    ऐसी जो बेटियो के प्रति, कुछ लोगों की सोच है,
    तो शायद वो जी के भी मर जाती..
    पर शायद वो जी जाती,
    तो इस दुनिया में कुछ तो बदलाव कर ही जाती..
    कुछ बन जाती, कुछ को बना जाती..
    पर हां शायद वो जी जाती,
    तो एक बार वो अपनी खुशी जाहिर जरूर कर पाती..
    उसकी हर ख्वाईश, हर तमन्ना पूरी हो जाती..
    सजाये जो उसने ख्वाब थे माँ की कोख में ही,
    उन सपनो को वो हकीकत कर पाती..
    अपना और अपने परिवार का नाम रौशन कर जाती..
    पर हां ये सब सच तब होता,
    गर शायद वो लड़की जी जाती..
    वो जी जाती, तो देख पाती..
    कि कैसे कोई (मनोगुरू) उसके बारे में लिख रहा है..
    उसकी उस अनसुनी आवाज को,
    कैसे मनोगुरू अल्फ़ाज दे रहा है..
    कि कैसे कोई उसके लिये लड़ने को तैयार खड़ा है..
    वो जी जाती, तो देख पाती..
    कि कैसे कोई (मनोगुरू) उसके बारे में लिख रहा है..

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