“काश…! कोई सुन लेता ” by मनोगुरू

ये देखो कोई मेरे लिए लिख रहा है , और मैं हूँ कि उसे देख ही नहीं पा रही कि आखिर मुझे लिखने वाला दिखता कैसा है। अरे…! तुमने भी नहीं पहचाना ? अरे मैं तो माँ की कोख में हूँ अभी इसीलिए किसी को नहीं देख पा रही । कोई बात नहीं , कुछ दिनों की ही बात है फिर कोख से बाहर आकर देखूंगी कि कैसी है ये बाहर की दुनिया और मेरे … Continue reading “काश…! कोई सुन लेता ” by मनोगुरू