“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव”

सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है….

जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है…..

आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…...

अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है…..

तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है….

खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है ….

सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है ,

बैर था क्या जीव से जो, दुख की सैया सुलाया है ……

पूछे मजबूरी अब ‘रब’ से, इस मातम को क्यूँ दिखाया है ?

आपदा का स्वरूप धर क्यूँ , जल ने तांडव मचाया है…..

जीवन्त ही देखो धरा पर , जल ने जीवन जलाया है…..

– मनोगुरू (one of dark days diary)

मनोगुरू का प्रयास इस कविता के माध्यम से बाढ़ से पीड़ित भावनाओं को आप तक पहुँचाने का है ।

प्रतिवर्ष कई परिवार और जीव जन्तु इस आपदा के काल गाल में समाते हैं , शायद जल का तांडव जारी रहेगा। लेकिन आप बे-सहारों का सहारा बन अपना फर्ज अदा करें । भावनाओं व संवेदनाओं की कद्र कर मददगार इन्सान बनने का प्रयत्न करें …

धन्यवाद

https://fb.me/manoguruhub

वो आज भी जिंदा हैं…

“तुम नहीं समझोगे” – मीरा श्रीवास्तव (गुरू माँ)

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

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