तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा

हम उनके लौटने की राह रोज देखते रहे ,
जिंदगी के स्वप्न को यूँ रोज भूलते रहे …
भूल वो गए मुझे तो क्या नई ये बात है ,
हम तो अब भी गीत में उन्हें ही ढालते रहे …

आज फिर वो खुश हुए जो हम उन्हें यूँ दिख गए ,
याद फिर वही किया जहां थे हम अटक गये …
वो आज पूछने लगी कि हाल कैसा है मेरा ,
कि पूछने लगी कहो कि प्यार कैसा है तेरा …

मन हुआ कहूँ कि आज भी वही विचार है ,
हाल थे बदल गए मगर तू ही तो प्यार है …
मगर सम्भल के बोला यूँ की ठीक ही तो हूं अभी ,
कि तूने साथ छोड़ा जब नही मिली कोई कभी …

कि साल आज भी वही कि हाल आज भी वही,
तुम्हारी याद आने पर सवाल आज भी वही …
कि दूर क्यों चली गयी बिना किसी जवाब के ,
जवाब न मिला किसी भी पन्ने में किताब के …
न तेरे सारे खत कभी जवाबदेही कर सके ,
न गीत और छंद भी तुझे सही बता सके …

कि ढूँढ़ता आज भी मुझे ही क्यों सज़ा मिली ,
कि प्यार ही न था तुझे यही मुझे वजह मिली …
मैं आज भी वही खड़ा कि प्यार या वफ़ा कहूँ ,
तू छोड़कर भी खुश थी तब कहो कि बेवफ़ा कहूँ

– कृष्णकांत वर्मा

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Manoguru

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