मुझे लिखना आया है – Mahi IAS Aspirant

Mahi IAS Aspirant

खुद को खोकर मैने खुद को पाया है
हालातों ने कभी पसीना तो कभी आँसू छलकाया है
संघर्ष करना भी तो इस वक़्त ने मुझे सिखलाया है
इस दिल को समझाया बहुत मैने कि
कौन मुझे यहाँ समझ पाया है
इस ज़िंदगी की धूप में तपकर ही
मुझे लिखना आया है….

कभी कभी बहुत परेशान हो जाती हूँ मैं,
जब जब लोगों की सोच में खुद को असमान पाती हूँ मैं…

Mahi IAS Aspirant

कुछ फ़र्ज़ी ख्यालात भी हमें सताते हैं
जैसे की हम उन्हें याद आते हैं….

Mahi IAS Aspirant

यूँ किसी को किसी की याद दिलाना अच्छी बात तो नहीं
यूँ किसी की आँखो से आंशुओं का छलकाना
अच्छी बात तो नहीं
हो सकता है ऐसा ना चाहते थे तुम,
लेकिन यूँ किसी के ज़ख़्मों को कुरेद कर
दर्द की सौगात देना अच्छी बात तो नहीं

Mahi IAS Aspirant

मुझ पर तुम एक एहसान कर दो
या तो दे दो अंज़ाम या अंजान कर दो
अब डर किस बात का अपना
दिल-ए-ख्यालात मेरे नाम कर दो
तुम्हारी उम्मीद बनकर कभी टूटेंगे ना ह्म
अपनी उम्मीद ज़रा सरेआम कर दो ना तुम

Writer – Mahi IAS Aspirant

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