“शायद तोहफा बेशकीमती है” – मनोकृति

“शायद तोहफा बेशकीमती है” – मनोकृति

बात कुछ ऐसी है कि हर रोज की तरह मेरी पोस्ट को इंस्टाग्राम पर लाइक करने का सिलसिला दोहराया जा रहा था पर इस बार बेहद खास होने वाला था अभी तक वाकिफ नहीं था इस होने वाले वाक़िये से। तब तक एक अंजान सी लड़की ने मेरी सारी पोस्ट को एक बार में देखा और लाइक किया जिससे की नोटिफिकेशन में अब वही वही दिख रही थी। पता नहीं क्यूँ पर उसकी ओर मन आकर्षित हुआ भी कि तब तक एक Hello का मैसेज आ भी गया। अब चूंकि वक़्त में सबको देता हूँ जो कि मेरी आदत भी है ,तो उसे भी तुरंत Hey का जवाब दिया । बस hey ही लिखकर में सीधा उसकी प्रोफाइल पर गया और एक सरीखी नजर दौड़ाई उसकी अब तक की पोस्ट पर और देखा साँवली सी सूरत पर बेजोड़ छवि को ,एक यकीन तो हुआ इससे कि चलो कोई fake नहीं है।फिर क्या बातचीत का सिलसिला शुरू और हकीकत कहूँ तो अपने काम में इतना मस्त था कि अब तक उसके एक भी प्रश्न का ध्यान से उत्तर भी नहीं दिया ।

पर उसके लगातार आ रहे मैसेज में एक चीज ज़रूर दिखी -“फिक्र” । हाँ भाई हाँ….!फिक्र ही , पता नहीं क्यूँ मैं नजरअंदाज कर रहा था हर बार पर कुछ तो था ऐसा जो ना चाहते हुए भी अपनेपन का वास्तविक एहसास करवा रहा था। जहाँ भी देखूँ चाहे fb हो या instagram, वो हर जगह बात करने को उतावली दिख रही थी।

खैर एक बात बेहद खास दिखी थी उसकी प्रोफाइल में कि उसे योगा पसंद है, जो वाकई बेहतरीन इंसान होने की निशानी है आज के इस व्यस्ततम दौर में , और हाँ अभी तक तो ये योगा ही एकमात्र गुण था उस अंजानी का जो मुझे अलग और खास लगा। इधर धीरे-धीरे ही सही पर बात तो हो ही रही थी । बातों – बातों में ही हम एक दूसरे को जानने की भरपूर कोशिश कर रहे थे पर ये तो आज भी नहीं समझ आ रहा था कि यह लगाव क्यूँ बढ़ता जा रहा था।

एक बात और कि काफी कुछ शौक , आदतें और गुण तालमेल बिठा रहे थे अरे एक जैसे थे हम कई मायनों में। तीन या चार दिन ही हुए होंगे पर बातें तो ऐसे हुई जैसे सदियों से एकदूजे को पहचानते और जानते हों। ना चाहते हुए भी उसकी शरारत भरी बातें मुझे क्यूँ अपनी ओर खींच सा रही थी।

तभी बातों बातों में ही एक दूसरे की उम्र भी पूछ बैठे और तब पता चला कि अगले दिन उसका जन्मदिन है। अरे हाँ भाई….! इसी दिन 20 वर्ष पूर्व वो गुड़िया इस जहान में आई थी जिससे आज मैं बतिया रहा था। अब जन्मदिन है तो कुछ तो देना ही चाहिए पर मैं नाचीज क्या देता उसे जो खुद ही एक तोहफा बनकर आई मेरी ज़िन्दगी में।

पर फिर भी चूँकि थोड़ा बहुत कलम को उकेरना सीख गया हूँ तो सोचा एक खत इसके लिए भी लिखूँ । महंगा तो नहीं है ये तोहफा पर बेशकीमती ज़रूर साबित होगा तुम्हारे लिए , ऐसा मेरा मानना है। अब कम वक्त में हम कितने करीब हो चुके हैं इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती ।

बस यही कामना करता हूँ कि शिव जी जिन्हें तुम बेहद मानती हो , वो तुम्हारे सारे अरमानों को पूरा करने का ज़ज़्बा प्रदान करे तुम्हें और तुम वो सब खुशियां और लक्ष्य हासिल करो जो तुम चाहते हो। अब आगे और क्या लिखूँ बाकी अनुभव के लिए शब्द चयन भी कम पड़ रहा है क्यूंकि अब तो अनंत तक ही पहुंचने का मन जो बना रखा है…….

तुम खुश रहना बस यही गुज़ारिश है और हाँ ! खत के समाप्त होने पर ना ही अंत हुआ है ऐसा लिख रहा हूँ और ना ही पूर्णविराम लगा रहा हूं क्यूंकि अभी तो आरम्भ हुआ है

– मनोकृति

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

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