“इकतरफ़ा रिश्ते” + “जिसकी दुनिया है” (मीरा श्रीवास्तव)

“जिसकी दुनिया है”

भगवान तेरी इस दुनिया में क्यूं दिल ठुकराये जाते हैं
क्यूं चाहने वालों के अरमां मिट्टी में मिलाये जाते हैं
दोलत शोहरत के रिश्ते नाते बाकी सब दफ़न कर दिये जाते हैं
मतलब के सब रिश्ते नाते बाकी सब छोड़ दिये जाते हैं
होती है बुराई की पूजा इस तेरी अंधी दुनिया में
बाकी ‌हर इन्सान आंसू की तरह मिट्टी में मिलाये जाते है
जीवन बगिया के मालिक तेरी इस दुनिया की रीत है क्या 
जो फूल खिले सेहरे के लिए अर्थी पर भी चढ़ाएं
जाते हैं
भगवान तेरी इस दुनिया में क्यूं सच्चे इंसान ही दुख पाते हैं 
क्यूं लेते रहते हो तुम उन्हीं की परीक्षा
क्यूं देते रहते हों इतने दर्द कि सहन नहीं कर पाते हैं
मुक्त करदो अब इन दर्दों से अब और सहे नहीं जाते हैं ।

मीरा श्रीवास्तव

 

इकतरफ़ा रिश्ते

पटरी के दो किनारे कभी भी मिलते नहीं है
एक तरफा प्यार कभी निभते नहीं है
टूट जाते हैं बिखर जाते हैं एक दिन सभी रिश्ते
प्यार में जब एक दूसरे की परवाह करते नहीं है
ख्याल रखना होता है एक दूसरे का प्यार में
वक्त देना पड़ता है एक दूसरे को प्यार में
मनुहार करनी पड़ती है जब अपने रूठे प्यार में
जब तक जरूरत ना महसूस हो एक दूसरे की प्यार में
तब तक रिश्ते कभी पनपते नहीं है
घाव देते रहे जो हर पल वो प्यार करते नहीं है
बेजुबान होकर अहसास करवाते हैं नफ़रतो का
हम पर ही लगातें है इल्जाम कि हमतो कभी कुछ कहते ही नहीं है
हमारे प्यार आंसुओं से भी कभी पसीजते नहीं है
माना मुश्किल होता है , पर ऐसे कांटों को निकाल फेंकना ही बेहतर होता है                                                           जो नश्तर से चुभते रहते हैं ना जीने देते हैं ना ही मरने देते हैं

मीरा श्रीवास्तव

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Try to understand every feelings and emotions.

“तुम नहीं समझोगे” – मीरा श्रीवास्तव (गुरू माँ)

 

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Manoguru

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