“मैं तुम और हम” —कवि अंकित

मैं तुम और हम” मैं डूबा तेरी आँखों में ,आँखों में मेरे पानी है….. कुछ उलझी , कुछ उलझन सुलझी अपनी एक कहानी है…. तेरे होंठों पे नाम जो आया, थोड़ा सा मुस्कराया…. रिश्तों को जरा सँजोए रखो , मौत तो हमको आनी है….. मेरे सपने कुछ हैं टूटे , कुछ तुमसे हैं जुड़े हुए …. जीवन के कुछ पन्ने अब भी हैं, थोड़े से मुड़े हुए…. मैं तुझसे पूरा होता हूँ , तू मुझमें … Continue reading “मैं तुम और हम” —कवि अंकित