वो ग़जल और हम – Rahul kumar

फिर सहेलियों संग खेला करती मैं,
ज़ख्म भर जाते ग़र दुवा करती मैं।
शायद इस लिए सांसे छीन ली मेरी,
जिंदा रहती तो दर्द बयां करती मैं।
……………………….rahul kumar

ख़ल रही है अब ये गुमानी मुझको,
अच्छे लोगो से है परेशानी मुझको।

मैं ता-उम्र बच्चा रहना चाहता हूँ,
जवां रखती है ये नादानी मुझको।

वो अपने ख़ताओ से हैरान नही है,
तो इसी बात की है हैरानी मुझको।अब कोई ज़हर असर नही करता,
मार रही है कोई जावेदनी मुझको।जो हमको इस जहां ने सुना रखा है,
उसने सुनाई वही कहानी मुझको।

मुझपे भी जफ़ा कम नही हुवे हैं,
कई किस्से याद है मुह-जुबानी मुझको।

जो मुझे शहज़ादा करार ना दे सके,
नही चहिये ऐसी भी रानी मुझको।

………………………..राहुल कुमार

एतबार में लागत क्या है,टूट जाना क्या होता है,
हमसे पूछो फुरक़त में,नज़र मिलाना क्या होता है।
ऐसा भी क्या अमली होना,ये तुमको समझाए कौन,
दिल लगाने में क्या है,दिल का आना क्या होता है।
………………………………….. rahul kumar

सर पे मेरे इस कदर की मुसीबत पड़ी है,
जैसे दवा को मर्ज़ की जरूरत पड़ी है।
चुभने लगी है अब तो सिलवटें बिस्तर की,
वदन को तेरे बाजुओं की आदत पड़ी है।
……………………………..Rahul Kumar

तज़ादे-मंज़र का आलम है,तेरी गली में जाए कौन,
तुझसे वाकिफ़ हो के भी,तुझसे दिल लगाए कौन।
इतना ज़फ़्त रखना होगा,तेरा ख़्वाब न आये फिर,
बाहों को समझा भी लेंगे,आँखों को समझाए कौन,
……………………………………Rahul Kumar

एक पैकश ने अर्सों जब कुछ पीने न दिया,
फिर किसी दरिया से न तिश्नगी गयी अपनी।
……………………………..राहुल कुमार

एतबार में लागत क्या है,टूट जाना क्या होता है,
हमसे पूछो फुरक़त में,नज़र मिलाना क्या होता है।
ऐसा भी क्या अमली होना,ये तुमको समझाए कौन,
दिल लगाने में क्या है,दिल का आना क्या होता है।
………………………………….. rahul kumar

एक ग़ज़ल / ek gazal…

फ़ज़ा भी आज नुमाईस में है,
यहाँ सब तेरी फरमाइश में है |

जो नज़र ने छु लिया है तुमको,
दिल जल जाने कोशिश में है |चाँद ने अब्र की रिदा ओढ़ ली,
सितारे तब से जुम्बिश में है |वो मोजिज़ा मेरे ख़्वाब का है,
जो राज़ तेरी ख्वाहिश में है |

हम कितने तेरे गिरफ़्त में है,
सारे ख़्वाब तेरे बंदिश में है |

अब हम भी दाव चलने लगे हैं,
लो हम भी तेरे साज़िस में है |

….राहुल कुमार

वदन का चारासाज मैं,दिल के मरीज़ हो तुम,
कितना मुन्फरीद हूँ मैं,कितने अजीब हो तुम।
वस्ल कैसे गवारा होता,मुख़्तलिफ़ जो इतना है,
पढ़ने की चीज़ हूँ मैं,देखने को चीज़ हो तुम।

राहुल कुमार

  • All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly prohibited.

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *