नज़्म औ गजल (रजत मिश्रा )

कभी तारों सा तू जल, कभी रातों को जला,
कभी दुनिया पे भी हंस, कभी दुनिया को हंसा,

तू पहलू में बिठा, ज़रा ला के ज़िंदगी,
कुछ किस्से उसके तू, फिर उसको ही सुना,

कभी बहरा बन के सुन, कभी गूंगा बन के गा,
जो भी मांगे ज़िंदगी, तू इसके पास ला,

ज़रा जीना आसां कर, ज़रा मसलों को बढ़ा,
तू उधारी की भी पी, तू उधार भी पिला,

अभी दोनो साथ हैं, कुछ सांसें और समय,
अभी मुझमें भी है जां, अभी धड़कन में है लय..

रजत मिश्रा

तेरे काँधे का शॉल बनूं या,
सर्दी में धूप की धार हो जाऊं,

मैं तेरी चाय का लुत्फ़ बढ़ा दूं,
काश तेरा अख़बार हो जाऊं..

तू जब बारिश में भीगती होगी,
तो कितना सच्चा गाती होगी,

काश तू जिसमें भीगके गाये,
मैं वही एक बौछार हो जाऊं..

रजत मिश्रा

मुझमें उतरने से कोई डरता नहीं,
मुझको और गहरा होना चाहिए था,
मैं सचमुच बहोत सुन लेता हूँ,
मुझको सचमुच बहरा होना चाहिए था..

रजत मिश्रा

नीम की शाख़ों पे बैठी कोयलों की मिसरियाँ,
बाग़ों में वो झूमती गाती हुई सी तितलियाँ,

सबने जैसे इश्क़ को जीने की इक वजह किया,
सबने जैसे इश्क़ कर के करना था जो कर लिया,

वो मगर जो शाख़ काटें, और वो जो बाग़ नोचें,
इश्क़ उनकी शय नहीं जो इश्क़ में सौ बार सोचें..

रजत मिश्रा

Author’s profile : रजत मिश्रा ( https://www.facebook.com/rajat.mishra.355 )

-all copyrights are reserved to the respected writer. Using any writeup without permission is highly prohibited.

Courtesy :” manoguru “( https://www.facebook.com/abhishekmanoguru/ )

“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)

काश…! कोई सुन लेता (part1)

वो आज भी जिंदा हैं…

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

One thought on “नज़्म औ गजल (रजत मिश्रा )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *