सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है।
रात में सबके बाद सोती है।
वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है।

सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है।
सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है।
वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है।

हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है।
पापा की डांट से बचाकर हमें अपने आँचल में छिपाती है।
वो माँ ही है यारो, जो हमारी एक आह भी पर हज़ार आँशु बहाती है।

होली दीवाली और ईद पर वो हफ़्तों पहले से पकवान बनाती है।
सबकी पसन्द न पसन्द का वो ख्याल में रख कर पकाती है।
वो माँ ही है यारो, जो हमारे लिए खुद को भी भूल जाती है।

जल भी जाये अगर कुछ बनाते वक्त तो उसे सबसे छुपाती है।
वो माँ ही है यारो, जो अपना दर्द भी हमारी खुशी में भूल जाती है।

नौव महीने कोख में लेकर वो हर तकलीफ से हंस कर गुजर जाती है।
हमे न देखे हुए भी हमारे लिए छोटे2 स्वेटर बनाती है,
वो माँ ही है यारो, जो हमे जीवन देने के लिए खुद की जिंदगी दांव पर लगाती है।

रिया स्वर्णकार

Manoguru

Hey...! My name is Abhishek Tripathi and pen name "Manoguru". Thanks a lot to be a member of my life by my these startups. I hope that you are easily understand me and my aim to change something in everyone. You know that -" Nobody can do everything but Everybody can do something". so activate your inner powers, talent, sensitivity , sincerity etc. Be a helping human... keep connected....... thanks again

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