Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)

एक कविता माँ को समर्पित, छात्रावासियों को समर्पित।

माँ मुझे तेरी याद आती है। 
जिन्दगी जब भी सताती है।
माँ मुझे तेरी याद आती है।

भूख हद से मचल जाती है,
जब रसोई में उंगली जल जाती है,
तू फूँक को कैसे मरहम बनाती है, 
माँ मुझे तेरी याद आती है।

रात किताबों में जब ढल जाती है,
नींद आँख में ही जल जाती है। 
कोई माँ जब कहीं लोरी सुनाती है,
माँ मुझे तेरी याद आती है।

जब हर दवा बेअसर जाती है।
जब तबियत हद कर जाती है। 
तू कैसे नजर का टुटका जलाती है,
माँ मुझे तेरी याद आती है।

जिन्दगी जब धूप मे जल जाती है। 
आँख आँसू मे पिघल जाती है। 
जब कोई माँ आँचल का छाता बनाती है,
माँ मुझे तेरी बहुत याद आती है।

जब तक तू मेरी दुनिया थी 
तब तक ये दुनिया अच्छी थी, 
अब तो ये दुनिया पल पल पे बदल जाती है, 
माँ मुझे तेरी याद आती है।

Rohit Rathore

The Winner of Happy Mother’s Day Writing Contest organized by The_Unheard_Voices

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