”बेटी के पति को हम बचायेंगे”- डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव

 

“बेटी नहीं बेटी के पति को हम बचायेंगे”

8 अप्रैल की रात्री में हम बिस्तर को धाये।
धाते ही हम निद्रा देवी की गोद में समाये।।
एक पहलवान लेकर सोटा हमारी ओर आये।
देख उनकी भाव भंगिमा हम बहुत घबराये।।
तान के सोटा बहुत क्रोध में मुझसे वह बोले।
आया तेरा अंतिम समय, नाम राम का लेले।।
करबध्द हो मैं बोला, श्रीमान यों न गुर्राईये ।
जानता नहीं मैं आपको, मेरा दोष तो बताईये।।
दे मूछों पे ताव बोले,बताता नर से भारी नारी।
अरे वैसाखनन्दन गयी है मति क्या तेरी मारी।।
भारी भरकम नर से भी नारी को भारी कहता।
सारी अक्ल तेरी अपने सोटे से ठीक हूँ करता।।
श्रीमति जी ने तभी जाने कहाँ से छलांग लगाई।
आयीं लेकर साथ में अपने, वह लठिया माई ।।
साथ में कुछ भगवा वस्त्र धारी नारियां थीआईं ।
फरमा रहीं थी घबराना नहीं हम है साथ आईं।।
बेटी नहीं बेटी के बेटी के पति को हम बचायेंगे।
इसे धमकाने वाले को भी सबक हम सिखायेंगे।।
मूछों वाले सज्जन पे गईं कस कर लठिया बजाई।
उनके मुह से चीख,हँसी से मेरी आँख खुल गयी।।

डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
“व्यथित हृदय मुरादाबादी”

 

नमन मनोगुरु परिवार, प्रस्तुत है डा0 आपके समक्ष,सादर ।

“पड़ा तमाचा तड़ाक”

पहुंचे बुध्दूराम पास गुरु जी के, लेकर हाथ में कागज़ ।
पहुंच कर पास गुरु जी के, लगे चाटने उनका मगज़ ।।
पूज्य गुरु जी हैं आप तो, ज्ञान के बहुत बड़े ही सिंघु ।
आता नहीं है मुझको तो लगाना ढ़ंग से कोई भी बिंदु ।।
लिखा है क्या,गौर कुछ तो उस पर भी आप फरमाईये ।
है वह क्या, दोहा, छन्द, या सोरठा, कुछ तो बताईये ।।
है नहीं इनमें कुछ,तो किया है गुरु जी क्या आविष्कार ।
किया है यदि आविष्कार, तो हो गया है यह चमत्कार ।।
पड़ी कान में उसके तभी,आवाज़ गुरु जी की बड़ी कड़क ।
कर दिया गुड़ गोबर सारा,पड़ा तमाचा गाल पर तड़ाक ।।

Writer -डा0 सुरेन्द्र सिंह यादव
व्यथित हृदय मुरादाबादी

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Dr. Surendra Singh Yadav ‘s Writeups—

 

Courtesy :- Abhishek Manoguru

Manoguru

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