हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद

ये शोखियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम, तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम, रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम हमारी आँख में पैवस्त एक सहरा है, अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम हर एक लफ्ज़ का मअनी तलाशते हो तुम, हर एक लफ्ज़ का मअनी कहाँ से लाएँ हम चलो बता दें जमाने को अपने बारे में, कि हर रोज…

"हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद"