तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा

हम उनके लौटने की राह रोज देखते रहे , जिंदगी के स्वप्न को यूँ रोज भूलते रहे … भूल वो गए मुझे तो क्या नई ये बात है , हम तो अब भी गीत में उन्हें ही ढालते रहे … आज फिर वो खुश हुए जो हम उन्हें यूँ दिख गए , याद फिर वही किया जहां थे हम अटक गये … वो आज पूछने लगी कि हाल कैसा है मेरा , कि पूछने लगी…

"तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा"