सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है। रात में सबके बाद सोती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है। सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है। सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है। हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है। पापा की…

"सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार"

Juhi Singh Chauhan

सिर से लेके पांव तक बस तुझसे बंधी हूँ मैं, कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं… यूं तो रीति रिवाज में ज्यादा नहीं पड़ती पर बात तेरी लम्बी उम्र की है इसलिए माथे पर अपने ये लाल रंग बड़े प्यार से सजाती हूँ मैं कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं नहीं फर्क पड़ता मुझे गर हाथो में चूड़ियां ना पहनूँ मैं पर बात…

"Juhi Singh Chauhan"