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पिताजी भारतीय सेना में थे और इसलिए अक्सर उनका हर दो या तीन साल में ट्रांसफर होता रहता था. यूँ तो पिताजी ने बहुत से ट्रांसफर देखे थे मगर वह पहला ट्रांसफर जो मुझे धुँधला धुँधला सा याद है सिलिगुरी से पचमढ़ी हुआ था. तब मैं कक्षा चार में था . वक़्त आ गया था जब हमने सामान पैक करना शुरू कर दिया . पिताजी के किट-बैग से लेकर बिस्तर-बंद तक सबकी पैकिंग मे बहुत…

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Manoguru

Do onething , surely you will get something. Abhishek Manoguru

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Riya Swarnkar

लफ़्ज़ों में कुछ कह पाना उस रात में बेहद मुश्किल होगा, जब सदियो से भटकते मुसाफिर के सामने घूंघट में छिपा उसका कारवां होगा। बढ़ती धड़कने और माहौल में सन्नाटों का शोर होगा, जब झुकी हुई नजरों का उठना और क़यामत का गिरना होगा। कपकपाते हाथो से उसकी नरम हथेलियों का यूँ छूना होगा, तब अंदर उमड़ता तूफान और बाहर खामोशियों का नजारा होगा। कंगन, बेंदी,झुकमों का जब उसके बदन को अलविदा कहना होगा, सिरह…

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Valentine in Metro – Manoguru

रोहित का,उसके गिरते हुए आंसुओं को देखते देखते ध्यान हाथों के मंजर पर पड़ा । अपनी उंगलियों से गुलाब की उन पंखुड़ियों को इस तरह मसल रही थी वो ,मानो आज का ये ज़ख्म गुलाब के ही काँटे ने दिया हो । खैर वो आज गुस्से में इतनी खोई हुई थी कि गुलाब तो कब का खाक हो चुका था अब तो वो अपनी उंगलियों का हाल बेहाल कर रही थी अंजाने में ही सही।…

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Monika Singh

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“Ishq in Aligarh ” -(Mohammad Arshaan)

” THE UNHEARD VOICES ” Founder – Mohammad Arshaan Novel – Ishq In Aligarh

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Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)

एक कविता माँ को समर्पित, छात्रावासियों को समर्पित। माँ मुझे तेरी याद आती है।  जिन्दगी जब भी सताती है। माँ मुझे तेरी याद आती है। भूख हद से मचल जाती है, जब रसोई में उंगली जल जाती है, तू फूँक को कैसे मरहम बनाती है,  माँ मुझे तेरी याद आती है। रात किताबों में जब ढल जाती है, नींद आँख में ही जल जाती है।  कोई माँ जब कहीं लोरी सुनाती है, माँ मुझे तेरी…

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Akanksha Tanwar

सुबह विदा ले चुकी थी और तपती दोपहरी अपना आक्रोश दिखा रही थी। मन विचलित सा था और दिल हताश। बहुत जगह रिज्यूमे मेल कर चुकी थी, पर कही से कोई पॉजिटिव रिस्पांस आ ही नही रहा था, शायद किसी जॉब के लायक थी ही नहीं मैं। कोस रही थी बैठे-बैठे खुद को और ऊपरवाले को। शिकायतें कर रही थी भगवान से उनकी ही कि हे भगवान जी शायद कुछ जल्दी जल्दी में बना दिया…

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“मरी हुई व्यवस्था” by Devansh Bharadwaj

“मरी हुई व्यवस्था” बच्चा ढूँढ कर मुझे, मेरे पास आता है मेरे कान में वो कुछ बताता है मैं सुनते ही थोड़ा सकपकाता हूँ पुलिस चौकी की ओर भागता हूँ इंस्पेक्टर को ढूंढता हूँ सारी बातें बोलता हूँ। किसी लड़की की इज्ज़त खतरे में है दरिन्दा जा पहुंचा उसके चबूतरे में है चबूतरे से कमरे की थोड़ी ही दूरी है साहब लड़की की इज्ज़त बचाना बहुत जरूरी है। वो कान में ऊँगली डालता हैं मेरी…

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Value of Beauty

सुंदरता का मूल्य। ===========अति सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई। वह ‘सुंदर’ महिला एयरहोस्टेस से बोली “मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों…

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वो ग़जल और हम – Rahul kumar

फिर सहेलियों संग खेला करती मैं, ज़ख्म भर जाते ग़र दुवा करती मैं। शायद इस लिए सांसे छीन ली मेरी, जिंदा रहती तो दर्द बयां करती मैं। ……………………….rahul kumar ख़ल रही है अब ये गुमानी मुझको, अच्छे लोगो से है परेशानी मुझको। मैं ता-उम्र बच्चा रहना चाहता हूँ, जवां रखती है ये नादानी मुझको। वो अपने ख़ताओ से हैरान नही है, तो इसी बात की है हैरानी मुझको।अब कोई ज़हर असर नही करता, मार रही…

"वो ग़जल और हम – Rahul kumar"