अंतर्विरोध कल और आज

अंतर्विरोध कल और आज – वीरू सिंह भारतीय समाज और राजनीति के तमाम अंतर्विरोध इस तरह पहले कब सतह पर तैरते दिखे थे, याद नहीं आता. भारतीय समाज के अंतर्विरोध पहली दफा तब दिखे थे जब मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करने का सरकारी फैसला लिया गया था. लेकिन मंडल की वज़ह से समाज दो-फाड़ नहीं हुआ था. मंडल के समर्थन या विरोध में जो आन्दोलन हुए, वे भी अधिकांशतः शहरों तक ही सीमित…

"अंतर्विरोध कल और आज"

“काश कोई सुन लेता” part2 — मनोगुरू

कोई कह दो ना कि रहने भी दो अब , भला मेरा क्या कसूर। शायद यही कि ल़ड़की हूँ फिर भी बस करो बेहद दर्द हो रहा है तुम्हारे नुकीले बेरहम औजारों से । माना कि अभी इस लायक नहीं हुई कि अपनी कराहती और बिलखती आवाज को आपकी बे-रहम , बेदर्द भावनाओं को सुना सकूँ मगर तुम सब तो बाहर की दुनिया में हो क्या कभी कोई चोट लगी या कटे नहीं हो जो…

"“काश कोई सुन लेता” part2 — मनोगुरू"