“मुद्दों की कमी नहीं देश में”

मुद्दों की कमी नहीं है हमारे देश में, देखिये हैवानियत घूम रही है किस किस वेश में कभी मुद्दा होता है आरक्षण का कभी किसी बेटी के भक्षण का, कभी सड़कें जलती हैं, कभी मोमबत्तिया पिघलती हैं, कोई कभी दंगा करता है, कोई इंसानियत को नंगा करता है, नेता भाषण बाचते हैं, विधायक खुले आम नाचते हैं जेल में मौत हो जाती है , एक बेबस लाचार पिता की क्या किसी ने सुनी चीख़ें ,…

"“मुद्दों की कमी नहीं देश में”"

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! मंदिर जैसी पवित्र जगह को अपने इरादे की तरह नापाक कर दिया !! क्या तुम्हें पता भी तुम लोगो ने क्या पाप कर दिया !! एक बच्ची का इंसानियत से तुमने भरोसा उठा दिया !! हम सबका सिर शर्म से तुमने झुका दिया !! पापी बाहर घूम रहे सब कर रहे बस निंदा हैं ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग…

"ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan"

वो मरती है , तो मरने दो – मनोगुरु

वो मरती है , तो मरने दो – मनोगुरु जो हो रहा है , होने दो कोई रो रहा है , रोने दो अरे सुना है …! कल कोई बेटी फिर से मरी है, खैर होता ये अब रोज , तो होने दो अरे सुना है…! देवस्थान पर भी कुछ हुआ था खैर होता है हर रोज , तो होने दो अरे सुना है …! आठ (8)साल की मासूम थी खैर आठ (8) महीने की…

"वो मरती है , तो मरने दो – मनोगुरु"