ज़िन्दगी

कल एक झलक देखी ज़िन्दगी की ,वो मेरी राहों में गुनगुना रही थी । फिर ढूँढा उसे दर-बदर , वो आँख-मिचौली कर मुस्करा रही थी । एक अरसे बाद आया मुझे करार , वो सहलाकर मुझे सुला रही थी ।हम दोनों क्यूँ है खफा एक दूजे से , मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी । मैंने पूछ लिया कि ,”क्यूँ दर्द दिया ज़ालिम तूने “? वो बोली , ” कि मैं ‘ज़िन्दगी’ हूँ…

"ज़िन्दगी"

” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव

सुनो, अब इंतेज़ार नही है तुम्हारा क्योंकि कुछ वादे कर तुम भूल चुके हो इंतेज़ार, नही है अब तुमको अपनी बाहों में भरने का क्योंकि अब तक तो तुम किसी और कि बाहों में खुद को खो चुके हो इंतेज़ार, नही हूँ तुम्हारे दिन को खास बनाने का क्योंकि अब तुम उस दिन को किसी और के साथ ख़ास बनाते हो इंतेज़ार, नही है कि तुम मुझे मेरी जगह दो क्योंकि वो जगह तो टीम…

"” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव"

Manoguru

ये खुमार-ए-इश्क है साहब…! अब शायद ना बीमारी जाएगी, कहते हो…! तो करता हूँ चैन से करार पर वक्त रहते बेकरारी तो जाएगी हूँ जमीं पे, तब तलक शायरबाजी ही भाएगी :- All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly prohibited.

"Manoguru"

Value of Beauty

सुंदरता का मूल्य। ===========अति सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई। वह ‘सुंदर’ महिला एयरहोस्टेस से बोली “मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों…

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जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani

आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना। हर मोड़ पर ये कड़े इम्तहां क्यूं लेती है, हौसलें यूं बना ए मुसाफिर,,, ये अपनों के लिए अपनों से ही हरा देती है। जिद्द जो कर लो हर हालात से लडने की, ये जिन्दगी जीना सीखा देती है। कोई नहीं बदलता यहां किसी के लिए,,,, ठोकरें जो लगी, ये खुद को बदलना सीखा देती है। सच है… आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना… कभी…

"जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani"

“The Battle” – Devansh Arora

“The Battle” – Devansh Arora The sun was up, She looked so messed up. Yet so beautiful to him, He looked deep into those eyes as if in those, he wanted to swim. She just nonchalantly smiled while they wished each other morning, None of them even had a clue what new storm was aborning. Like every usual day they started to get ready for work, They have fought many battles to be together but…

"“The Battle” – Devansh Arora"

धर्म के नाम पर गुमराह – (मानस कुमार देव)-

– मानस कुमार देव –   बेखबर कब तक रहोगे जमाने से, खुद में ही ऐसे कब तक सिमटे रहोगे, खिड़कियां-दरवाजे खोलकर तो देखो, तेरे दर पर भी दस्तक दे रहा है धुआं, कब तलक खुद को छिपाये रखोगे, जंजीर गुलामी की बढ़ती जा रही है, इस बात को कब तलक समझ जाओगे, द्वेष जो फैलाया जा रहा धर्म पर, कब तलक आँखें बन्द करके चलते रहोगे, गर अभी समझ जाते हो सारी बातें, जान…

"धर्म के नाम पर गुमराह – (मानस कुमार देव)-"

“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-2 (मनोगुरु)

हाँ तो बात कहाँ तक पहुँची थी कि मैं उस इकलौते डिब्बे का कुमार विश्वास था मानो , फिर धीरे -धीरे सबने अपना-अपना हुनर दिखाना शुरू कर दिया |कोई हसा रहा था तो कोई मेरी ही तरह अपनी कविताओ को पेश करने लगा | तभी एक शख्स ने, अरे…! उम्मीदवार ने ही अपनी कलाकारी को मेरी नज़रो के सामने रख दिया , जिस पर मेरी निगाहे भी टिक गयी |नाम तो आज भी याद है…

"“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-2 (मनोगुरु)"

कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “

जो बीत गया है वो कभी आ नही सकता कोई वक़्त से पहले यहा कुछ पा नही सकता जीवन है एक अनमोल सफर देखकर चलना कुदरत का भजन कर कोई ठुकरा नही सकता कवि मयंक मिश्रा रायबरेली   मेरा दिल तोड़ने वाले तेरा दिल टूट जायेगा। सवेरा है तो मुस्कालो अँधेरा भी तो आयेगा समय अच्छा तो सब संग हैं मगर इतना न इतराओ । बुरा जब वक़्त होगा तो न कोई पास आएगा। कवि…

"कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “"

“इकतरफ़ा रिश्ते” + “जिसकी दुनिया है” (मीरा श्रीवास्तव)

“जिसकी दुनिया है” भगवान तेरी इस दुनिया में क्यूं दिल ठुकराये जाते हैं क्यूं चाहने वालों के अरमां मिट्टी में मिलाये जाते हैं दोलत शोहरत के रिश्ते नाते बाकी सब दफ़न कर दिये जाते हैं मतलब के सब रिश्ते नाते बाकी सब छोड़ दिये जाते हैं होती है बुराई की पूजा इस तेरी अंधी दुनिया में बाकी ‌हर इन्सान आंसू की तरह मिट्टी में मिलाये जाते है जीवन बगिया के मालिक तेरी इस दुनिया की…

"“इकतरफ़ा रिश्ते” + “जिसकी दुनिया है” (मीरा श्रीवास्तव)"

“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)

दरअसल बात उन दिनों की है , जब मैं भी सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के अग्निकुण्ड में गोते लगा रहा था | एक बार पुनः उसी सिलसिले मैं इंदौर की ओर रवाना हुआ लेकिन इस बार का सफ़र यादगार रहेगा इस बात का अंदाज़ा तो नही था। खैर वही हर बार की तरह मेरा कहना कि , ” कल देखा किसने” सो मैं भी बस मस्ताना सा चल दिया । लेकिन समस्या यह थी की…

"“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)"