तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा

हम उनके लौटने की राह रोज देखते रहे , जिंदगी के स्वप्न को यूँ रोज भूलते रहे … भूल वो गए मुझे तो क्या नई ये बात है , हम तो अब भी गीत में उन्हें ही ढालते रहे … आज फिर वो खुश हुए जो हम उन्हें यूँ दिख गए , याद फिर वही किया जहां थे हम अटक गये … वो आज पूछने लगी कि हाल कैसा है मेरा , कि पूछने लगी…

"तुम ही तो प्यार हो – कृष्णकांत वर्मा"

” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव

सुनो, अब इंतेज़ार नही है तुम्हारा क्योंकि कुछ वादे कर तुम भूल चुके हो इंतेज़ार, नही है अब तुमको अपनी बाहों में भरने का क्योंकि अब तक तो तुम किसी और कि बाहों में खुद को खो चुके हो इंतेज़ार, नही हूँ तुम्हारे दिन को खास बनाने का क्योंकि अब तुम उस दिन को किसी और के साथ ख़ास बनाते हो इंतेज़ार, नही है कि तुम मुझे मेरी जगह दो क्योंकि वो जगह तो टीम…

"” अब इन्तेजार नहीं तुम्हारा ” – आयुषी श्रीवास्तव"

जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा

*जन्नत का इश्क़* जन्नत – बहुत सुंदर लड़की थी जो अभी 17 साल की थी .. उसका एक दोस्त था टेडी जिससे वो बात करती थी बड़ी ही अजब कहानी थी उसकी और उसके टेडी की । टेडी को प्यार से वो स्वीटू शोना बुलाती थी ये कहानी शुरू होती है जब जन्नत कुछ 17 साल की रही होगी उसके पापा एक मेले में जाते है उसे लेके बहुत अच्छे खिलोने व झूले देख कर…

"जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा"

Manoguru

ये खुमार-ए-इश्क है साहब…! अब शायद ना बीमारी जाएगी, कहते हो…! तो करता हूँ चैन से करार पर वक्त रहते बेकरारी तो जाएगी हूँ जमीं पे, तब तलक शायरबाजी ही भाएगी :- All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly prohibited.

"Manoguru"

Riya Swarnkar

लफ़्ज़ों में कुछ कह पाना उस रात में बेहद मुश्किल होगा, जब सदियो से भटकते मुसाफिर के सामने घूंघट में छिपा उसका कारवां होगा। बढ़ती धड़कने और माहौल में सन्नाटों का शोर होगा, जब झुकी हुई नजरों का उठना और क़यामत का गिरना होगा। कपकपाते हाथो से उसकी नरम हथेलियों का यूँ छूना होगा, तब अंदर उमड़ता तूफान और बाहर खामोशियों का नजारा होगा। कंगन, बेंदी,झुकमों का जब उसके बदन को अलविदा कहना होगा, सिरह…

"Riya Swarnkar"

जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani

आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना। हर मोड़ पर ये कड़े इम्तहां क्यूं लेती है, हौसलें यूं बना ए मुसाफिर,,, ये अपनों के लिए अपनों से ही हरा देती है। जिद्द जो कर लो हर हालात से लडने की, ये जिन्दगी जीना सीखा देती है। कोई नहीं बदलता यहां किसी के लिए,,,, ठोकरें जो लगी, ये खुद को बदलना सीखा देती है। सच है… आसां तो नहीं जिन्दगी को जिन्दगी बना लेना… कभी…

"जिन्दगी इम्तहां क्यूं लेती है – Kusum Chokhani"

जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

"जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”"

गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)

प्यार करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं सबको अपना समझना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं अपनों पर विश्वास करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मै अपनो से अपने पन की प्यार मोहब्बत की छोटी छोटी खुशियों की चाहत रखना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं, गुनाहों की सज़ा अपने ही मुझे खूब दे रहे हैं हम जिनसे करते हैं प्यार हमें नज़र अंदाज़ कर रहे हैं, नफ़रत के नश्तर हर पल चुभो रहें…

"गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)"

रंजिश नहीं है होली (राहुल मिश्रा)

रंजिश नहीं है होली (राहुल मिश्रा) उम्र तकरीबन दस साल रही होगी. आज ही की तरह होली का दिन था. मेरे मोहल्ले के एक लड़के ने मेरे मूँह पे रंग भरा गुब्बारा फोड़ दिया. “फ़चाक” की आवाज़ के साथ ही वहाँ खड़ा हर कोई ठहाके मार कर मुझपे हँसने लगा. उसका ये मज़ाक मुझे पसंद नहीं आया और मैंने उसको एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया. चार घंटे बाद ही वह अपने भाई को ले…

"रंजिश नहीं है होली (राहुल मिश्रा)"

क़ाफ़िर कौन होता है ? ( चिराग शर्मा )

एक  ग़ज़ल  हमें भी तो चले मालूम आख़िर कौन होता है । ख़ुदा से पूछ के आओ “ये क़ाफ़िर कौन होता है ?” इक आंसू कर गया हिजरत मेरी आँखों की चौखट से, जब इक बच्चे ने ये पूछा “मुहाजिर कौन होता है ?” कमानें डाल दीं जब चाँद ने ही रात के आगे, उजाले बांटने वाला दिया फिर कौन होता है किसी की शक्ल लेने लगती है दीवार की सीलन, भला तन्हाई से अच्छा…

"क़ाफ़िर कौन होता है ? ( चिराग शर्मा )"

कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “

जो बीत गया है वो कभी आ नही सकता कोई वक़्त से पहले यहा कुछ पा नही सकता जीवन है एक अनमोल सफर देखकर चलना कुदरत का भजन कर कोई ठुकरा नही सकता कवि मयंक मिश्रा रायबरेली   मेरा दिल तोड़ने वाले तेरा दिल टूट जायेगा। सवेरा है तो मुस्कालो अँधेरा भी तो आयेगा समय अच्छा तो सब संग हैं मगर इतना न इतराओ । बुरा जब वक़्त होगा तो न कोई पास आएगा। कवि…

"कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “"