Akanksha Tanwar

सुबह विदा ले चुकी थी और तपती दोपहरी अपना आक्रोश दिखा रही थी। मन विचलित सा था और दिल हताश। बहुत जगह रिज्यूमे मेल कर चुकी थी, पर कही से कोई पॉजिटिव रिस्पांस आ ही नही रहा था, शायद किसी जॉब के लायक थी ही नहीं मैं। कोस रही थी बैठे-बैठे खुद को और ऊपरवाले को। शिकायतें कर रही थी भगवान से उनकी ही कि हे भगवान जी शायद कुछ जल्दी जल्दी में बना दिया…

"Akanksha Tanwar"

Juhi Singh Chauhan

सिर से लेके पांव तक बस तुझसे बंधी हूँ मैं, कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं… यूं तो रीति रिवाज में ज्यादा नहीं पड़ती पर बात तेरी लम्बी उम्र की है इसलिए माथे पर अपने ये लाल रंग बड़े प्यार से सजाती हूँ मैं कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं नहीं फर्क पड़ता मुझे गर हाथो में चूड़ियां ना पहनूँ मैं पर बात…

"Juhi Singh Chauhan"

“मरी हुई व्यवस्था” by Devansh Bharadwaj

“मरी हुई व्यवस्था” बच्चा ढूँढ कर मुझे, मेरे पास आता है मेरे कान में वो कुछ बताता है मैं सुनते ही थोड़ा सकपकाता हूँ पुलिस चौकी की ओर भागता हूँ इंस्पेक्टर को ढूंढता हूँ सारी बातें बोलता हूँ। किसी लड़की की इज्ज़त खतरे में है दरिन्दा जा पहुंचा उसके चबूतरे में है चबूतरे से कमरे की थोड़ी ही दूरी है साहब लड़की की इज्ज़त बचाना बहुत जरूरी है। वो कान में ऊँगली डालता हैं मेरी…

"“मरी हुई व्यवस्था” by Devansh Bharadwaj"

शायर वरुण आनन्द

यूं अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम सुलगती रेत पे ऊँगली से पानी लिख रहे थे हम یوں اپنی پیاس کی خود ہی کہانی لکھ رہے تھے ہم سلگتی ریت پہ انگلی سے پانی لکھ رہے تھے ہم मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई जहाँ पर ज़िन्दगानी ज़िन्दगानी लिख रहे थे हम میاں بس موت ہی سچ ہے وہاں یہ لکھ گیا کوئ جہاں بس زندگانی…

"शायर वरुण आनन्द"

पत्थर में भगवान कहां…..?

पत्थर में भगवान कहां…..? मूक मूर्ति है मंदिर में, पत्थर में भगवान कहां। पत्थर दिल ये लोग हो गए, लोगों में इंसान कहां। मेरा धर्म मैं खुद देखूंगा, मत धर्म के ठेकेदार बनो। आखिर किस धर्म ने कहा, मासूमों पे अत्याचार करो। बेटी सी फूल सी बच्ची वो, तेरे हाथ ज़रा भी कांपे न। आंसू, दर्द, चीख-पुकार, गुहार को सुन तू भांपे न। क्या बीत रही होगी उसपे, क्या बीतेगी परिवार पे अब। क्या हवस…

"पत्थर में भगवान कहां…..?"

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! मंदिर जैसी पवित्र जगह को अपने इरादे की तरह नापाक कर दिया !! क्या तुम्हें पता भी तुम लोगो ने क्या पाप कर दिया !! एक बच्ची का इंसानियत से तुमने भरोसा उठा दिया !! हम सबका सिर शर्म से तुमने झुका दिया !! पापी बाहर घूम रहे सब कर रहे बस निंदा हैं ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग…

"ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan"