जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

"जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”"