सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा

कितना मुश्किल है सत्य की राह पर आगे बढ़ना… झूठ आवाजें देता है बार बार पुकारता है पूरी शिद्दत से कि कमजोर पड़ जाओ तुम बस मुड़कर देखो तुम प्रतीक्षा करता है उस एक पल की जब भावनाओं का प्रबल प्रवाह क्षीण कर दे तुम्हारी इच्छाशक्ति और तुम पलट कर एक दृष्टि झूठ पर डालो उसी एक क्षीण क्षण में जकड़ लेता है तुम्हें संवेदनाओं का एक जाल भ्रमित करता है तुम्हें अपनी सम्मोहन शक्ति…

"सत्य की राह – पायल भारद्वाज शर्मा"

www.mizaajemishra.com

पिताजी भारतीय सेना में थे और इसलिए अक्सर उनका हर दो या तीन साल में ट्रांसफर होता रहता था. यूँ तो पिताजी ने बहुत से ट्रांसफर देखे थे मगर वह पहला ट्रांसफर जो मुझे धुँधला धुँधला सा याद है सिलिगुरी से पचमढ़ी हुआ था. तब मैं कक्षा चार में था . वक़्त आ गया था जब हमने सामान पैक करना शुरू कर दिया . पिताजी के किट-बैग से लेकर बिस्तर-बंद तक सबकी पैकिंग मे बहुत…

"www.mizaajemishra.com"

सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है। रात में सबके बाद सोती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है। सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है। सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है। हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है। पापा की…

"सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार"

Manoguru

Do onething , surely you will get something. Abhishek Manoguru

"Manoguru"

Sakshi Chauhan

दो वक़्त का खाना जुटाना जिनके लिए बड़ा मुश्किल होता है… चाहे जितनी कड़ी धूप हो या ठिठुरती ठंड, उनके पास रहने को घर कहाँ होता है… सपने तो ढेरों, आँखों मैं उनकी भी होते हैं, पर साकार करने का साधन , उनके पास कहाँ होता है… अपने बच्चों को अफ़सर बनाना वो भी चाहता है, पर उसका ये सपना सिर्फ़ सपना बनकर रह जाता है… कभी ढाबे में काम कर , कभी बड़े घरों…

"Sakshi Chauhan"

Monika Singh

Monika Singh (Nick) – All copyrights are reserved to the respected writer. Using any content without permission is highly prohibited.

"Monika Singh"

“Ishq in Aligarh ” -(Mohammad Arshaan)

” THE UNHEARD VOICES ” Founder – Mohammad Arshaan Novel – Ishq In Aligarh

"“Ishq in Aligarh ” -(Mohammad Arshaan)"

Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)

Harshit kushwaha जब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मैं अपने शहर से दूसरे शहर गया था। जहां पर मुझे कॉलेज के छात्रावास में ही रहना पड़ता था।  बात उस वक्त की है जब मैं दिसंबर के महीने में भयंकर ठंड पड़ने के कारण रात के तकरीबन 2 बजे मुझे बहुत तेज बुखार था।हालांकि जवानी के सारे अच्छे दोस्त मेरे करीब ही थे । पर फिर भी दोस्त सिर्फ दोस्त ही होते हैं।  उस वक्त…

"Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)"

Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)

एक कविता माँ को समर्पित, छात्रावासियों को समर्पित। माँ मुझे तेरी याद आती है।  जिन्दगी जब भी सताती है। माँ मुझे तेरी याद आती है। भूख हद से मचल जाती है, जब रसोई में उंगली जल जाती है, तू फूँक को कैसे मरहम बनाती है,  माँ मुझे तेरी याद आती है। रात किताबों में जब ढल जाती है, नींद आँख में ही जल जाती है।  कोई माँ जब कहीं लोरी सुनाती है, माँ मुझे तेरी…

"Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)"

Akanksha Tanwar

सुबह विदा ले चुकी थी और तपती दोपहरी अपना आक्रोश दिखा रही थी। मन विचलित सा था और दिल हताश। बहुत जगह रिज्यूमे मेल कर चुकी थी, पर कही से कोई पॉजिटिव रिस्पांस आ ही नही रहा था, शायद किसी जॉब के लायक थी ही नहीं मैं। कोस रही थी बैठे-बैठे खुद को और ऊपरवाले को। शिकायतें कर रही थी भगवान से उनकी ही कि हे भगवान जी शायद कुछ जल्दी जल्दी में बना दिया…

"Akanksha Tanwar"

तुम ऐैसे कैसे भगवान ?

तुम ऐैसे कैसे भगवान ? भक्त जो आस्था से, आते तुम्हारे द्वार । देखने ,सूनने कोई चमत्कार । देखने कोई साक्षात्कार । तेरा रूप देखकर होते धन्य । चरणस्पर्श कर,कमाते पूण्य । हम भी मानते है भगवान । लेकिन, तेरे रूप में घुम रहे, धरती पर कई इन्सान । जो बन बैठें है भगवान । और हम नादान, ,मानते है उन्हें भगवान । उनकी दुनिया है नीराली । सब कष्ट,दुःख,समस्या का समाधान। उनका अपना है,अद्भूत…

"तुम ऐैसे कैसे भगवान ?"