सुनो..! माँ ऐसी होती है – रिया स्वर्णकार

सुबह सूरज से पहले उठती है। रात में सबके बाद सोती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद की फिक्र छोर हमारे लिए दिन रात मरती है। सुबह क्या बनेगा ये सोचते-सोचते सोती है। सबको सबके वक्त ही पर ही खिलाती है। वो माँ ही है यारो, जो खुद के नास्ते का पहला निवाला दोहपहर में खाने के वक़्त खाती है। हमारी छोटी-छोटी खुशियों पर हमसे भी ज्यादा खुश हो जाती है। पापा की…

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जाग जाओ नहीं तो पछताओगे- “बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा”

माँ की ममता  – कवि  बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)  जिसने मुझको जनम दिया, उस माॅ को मैं भुलूॅ कैसे अपने कर्म का फल है भाई, अपने कर्म को भुलूॅ कैसे ।। माॅ की आॅचल के नीचे हम, कितना सकुन पा लेते हैं ममता की देवी अपनी है माता, उनके चरण छु लेते हैं । माॅ के दिल में दर्द है होता, जब बच्चे को कुछ होता है बच्चा भी है रहता पूत जब तक, जब…

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The Glorious history of International Women Day

क्या है अंतर्राष्ट्रीय स्त्री दिवस (8 मार्च) का गौरवशाली इतिहास: यह एक त्रासदी है कि पूंजी की ताकत के ख़िलाफ़ मेहनतकश स्त्रियों के संघर्षों के परिणामस्वरूप उपजे 8 मार्च को आज बाज़ार की ताकतें co-opt करके एक जुझारू क्रांतिकारी विरासत को कलंकित कर रही है. वह 8 मार्च को भी एक माल के रूप में बेच रही है. Women Empowerment के नाम पर बड़ी-बड़ी कंपनियों की CEO, अधिकारयों (जो खुद मेहनतकशों के शोषण में भूमिका…

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“काश कोई सुन लेता” part2 — मनोगुरू

कोई कह दो ना कि रहने भी दो अब , भला मेरा क्या कसूर। शायद यही कि ल़ड़की हूँ फिर भी बस करो बेहद दर्द हो रहा है तुम्हारे नुकीले बेरहम औजारों से । माना कि अभी इस लायक नहीं हुई कि अपनी कराहती और बिलखती आवाज को आपकी बे-रहम , बेदर्द भावनाओं को सुना सकूँ मगर तुम सब तो बाहर की दुनिया में हो क्या कभी कोई चोट लगी या कटे नहीं हो जो…

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“माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं” -मनोगुरू

माँ-बाप हैं , कोई बोझ नहीं अरमान देख उनके, सब कुछ लुटा दिया, सम्मान देखा उनका , ये सर ही झुका दिया… देखा जो गिरते उनको , हाथों से उठा दिया कोई कभी माँ-बाप ना उनका, कहकर रुला दिया अब हम उम्र की दहलीज पर, तो ख्यालों से गिरा दिया अभिषेक त्रिपाठी ‘मनोगुरू’ ↑….↓ + kavyana (Anamika) कम्बख्त वक्त का रुख देखो , बिन आस के हम जीते देखो…. हर साँस में बसता “वो” अब…

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