तुम ऐैसे कैसे भगवान ?

तुम ऐैसे कैसे भगवान ? भक्त जो आस्था से, आते तुम्हारे द्वार । देखने ,सूनने कोई चमत्कार । देखने कोई साक्षात्कार । तेरा रूप देखकर होते धन्य । चरणस्पर्श कर,कमाते पूण्य । हम भी मानते है भगवान । लेकिन, तेरे रूप में घुम रहे, धरती पर कई इन्सान । जो बन बैठें है भगवान । और हम नादान, ,मानते है उन्हें भगवान । उनकी दुनिया है नीराली । सब कष्ट,दुःख,समस्या का समाधान। उनका अपना है,अद्भूत…

"तुम ऐैसे कैसे भगवान ?"

Modernisation

“रोटी” माथे पर, कड़क तडपता सूरज। बदन की करता लाही । सूलगे हुए सपने संग, झूलसाती गर्मी में । हवा के झोके से, मिले हल्का सूकुन । फटा हुवा गमछा , पोछता सारा पसीना । छिटक कर हाथ से, माथे की बूंदे । देखता एक बार, सूरज की ओर । फिर, पेड़ के निचे बैठकर । एक मजदुर, खाता है रोटी, तोड़कर एक एक कौर । प्रदीप सहारे लोधिवली-पनवेल “अाधुनिकता” आधुनिकता के मोह में, एैसे…

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