हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद

ये शोखियाँ ये जवानी कहाँ से लाएँ हम, तुम्हारे हुस्न का सानी कहाँ से लाएँ हम मोहब्बतें वो पुरानी कहाँ से लाएँ हम, रुकी नदी में रवानी कहाँ से लाएँ हम हमारी आँख में पैवस्त एक सहरा है, अब ऐसी आँख में पानी कहाँ से लाएँ हम हर एक लफ्ज़ का मअनी तलाशते हो तुम, हर एक लफ्ज़ का मअनी कहाँ से लाएँ हम चलो बता दें जमाने को अपने बारे में, कि हर रोज…

"हाल अब कश्मीर वाले हैं – वरुण आनंद"

शायर वरुण आनन्द

यूं अपनी प्यास की ख़ुद ही कहानी लिख रहे थे हम सुलगती रेत पे ऊँगली से पानी लिख रहे थे हम یوں اپنی پیاس کی خود ہی کہانی لکھ رہے تھے ہم سلگتی ریت پہ انگلی سے پانی لکھ رہے تھے ہم मियाँ बस मौत ही सच है वहाँ ये लिख गया कोई जहाँ पर ज़िन्दगानी ज़िन्दगानी लिख रहे थे हम میاں بس موت ہی سچ ہے وہاں یہ لکھ گیا کوئ جہاں بس زندگانی…

"शायर वरुण आनन्द"

गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)

प्यार करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं सबको अपना समझना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं अपनों पर विश्वास करना गुनाह है तो गुनहगार हूं मै अपनो से अपने पन की प्यार मोहब्बत की छोटी छोटी खुशियों की चाहत रखना गुनाह है तो गुनहगार हूं मैं, गुनाहों की सज़ा अपने ही मुझे खूब दे रहे हैं हम जिनसे करते हैं प्यार हमें नज़र अंदाज़ कर रहे हैं, नफ़रत के नश्तर हर पल चुभो रहें…

"गुनहगार हूं मैं (” मीरा श्रीवास्तव “)"

क़ाफ़िर कौन होता है ? ( चिराग शर्मा )

एक  ग़ज़ल  हमें भी तो चले मालूम आख़िर कौन होता है । ख़ुदा से पूछ के आओ “ये क़ाफ़िर कौन होता है ?” इक आंसू कर गया हिजरत मेरी आँखों की चौखट से, जब इक बच्चे ने ये पूछा “मुहाजिर कौन होता है ?” कमानें डाल दीं जब चाँद ने ही रात के आगे, उजाले बांटने वाला दिया फिर कौन होता है किसी की शक्ल लेने लगती है दीवार की सीलन, भला तन्हाई से अच्छा…

"क़ाफ़िर कौन होता है ? ( चिराग शर्मा )"

कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “

जो बीत गया है वो कभी आ नही सकता कोई वक़्त से पहले यहा कुछ पा नही सकता जीवन है एक अनमोल सफर देखकर चलना कुदरत का भजन कर कोई ठुकरा नही सकता कवि मयंक मिश्रा रायबरेली   मेरा दिल तोड़ने वाले तेरा दिल टूट जायेगा। सवेरा है तो मुस्कालो अँधेरा भी तो आयेगा समय अच्छा तो सब संग हैं मगर इतना न इतराओ । बुरा जब वक़्त होगा तो न कोई पास आएगा। कवि…

"कवि मयंक मिश्रा ” रायबरेली “"

” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )

“परम सत्य” उस एक परम सत्य ने , हमेशा से सबको छला है । वो मृत्यु है , कर देता है चेतनाशून्य , सक्रिय शरीर को । बिना किसी आहट के, सेंध लगा जाता है इस शरीर में । खींच ले जाता है प्राण वायु , निस्पंद कर जाता है, इस काया को । निर्जीव कर जाता है । पूर्ण विस्राम दे जाता है । छोङ जाता है मिट्टी का काया , मिला देने के…

"” परम सत्य ” – ( शारदा मेहता )"

वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)

सज़ा ए ज़ीस्त बढाने का काम करते हैं जो मेरी जान बचाने का काम करते हैं سزا ئے زیست بڑھانے کا کام کرتے ھیں جو میری جان بچانے کا کام کرتے ھیں हमारा नाता है उस क़ैस के घराने से कि हम भी ख़ाक उड़ाने का काम करते हैं ہمارا ناتا ھے اس قیس کے گھرانے سے کہ ہم بھی خاک اڑانے کا کام کرتے ھیں हमारी आँख के अश्कों को रायेगाँ न समझ ये…

"वरुण आनंद (शायर लुधियानवी)"

गर तुम पढ़ लेती

बात बेबात ऐसे न सताओ उनको जख्म दो पर ऐसे न भुलाओ उनको ये जो आखों में रखे है मोती थोड़े ये अमानत है ऐसे न लुटाओ उनको बातो बातो मे ऐसे न बहलाओ उनको जरा सी बात है थोड़ा सा मनाओ उनको वो मान जाएगें ऐसी तो कोई बात नही ये तो अपने है ऐसे न रूलाओ उनको – आशुतोष पाण्डेय शब्द सा तुम बनी, अर्थ मै हो गया। आत्मा तुम बनी, देह मै…

"गर तुम पढ़ लेती"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू

1.↓ “वो बे-परवाह शख्स” ↓ जूझ बैठा आज मन , बस ख्वाब में उस शख्स से पूछ बैठा आज सुन , शीशे में अपने अश्क से…. बेवक्त ही क्या वक्त माँगा …? सिरफिरे कम्बख्त ने…… वक्त था पर ना दिया, उस दिल-ए-सख्त ने…… वक्त भी बे-वक्त बोला, माँगा ही क्यूँ उस शख्स से…? सख्त था जो ना दिया, उस दिल-ए-कम्बख्त ने…… सूझ बैठा आज क्यूँ , जूझने को अश्क से पूछ बैठा आज क्यूँ ,…

"“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू"