“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी

*शायद गलत हो तुम * * अगर तुम्हें लगता है कि – हर पल सिर्फ उसके बारे में सोचना ही मोहब्बत है – तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- सारी रात जग कर उससे बातें करना ही मोहब्बत है -तो, शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है- कि चंद बेवाक् कसमें और वादे कर देना ही मोहब्बत है – तो शायद गलत हो तुम ! *अगर तुम्हें लगता है…

"“शायद तुम गलत हो”- अंकित त्रिपाठी"

“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)

दरअसल बात उन दिनों की है , जब मैं भी सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के अग्निकुण्ड में गोते लगा रहा था | एक बार पुनः उसी सिलसिले मैं इंदौर की ओर रवाना हुआ लेकिन इस बार का सफ़र यादगार रहेगा इस बात का अंदाज़ा तो नही था। खैर वही हर बार की तरह मेरा कहना कि , ” कल देखा किसने” सो मैं भी बस मस्ताना सा चल दिया । लेकिन समस्या यह थी की…

"“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)"