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पिताजी भारतीय सेना में थे और इसलिए अक्सर उनका हर दो या तीन साल में ट्रांसफर होता रहता था. यूँ तो पिताजी ने बहुत से ट्रांसफर देखे थे मगर वह पहला ट्रांसफर जो मुझे धुँधला धुँधला सा याद है सिलिगुरी से पचमढ़ी हुआ था. तब मैं कक्षा चार में था . वक़्त आ गया था जब हमने सामान पैक करना शुरू कर दिया . पिताजी के किट-बैग से लेकर बिस्तर-बंद तक सबकी पैकिंग मे बहुत…

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जन्नत का इश्क़ – अनुष्का वर्मा

*जन्नत का इश्क़* जन्नत – बहुत सुंदर लड़की थी जो अभी 17 साल की थी .. उसका एक दोस्त था टेडी जिससे वो बात करती थी बड़ी ही अजब कहानी थी उसकी और उसके टेडी की । टेडी को प्यार से वो स्वीटू शोना बुलाती थी ये कहानी शुरू होती है जब जन्नत कुछ 17 साल की रही होगी उसके पापा एक मेले में जाते है उसे लेके बहुत अच्छे खिलोने व झूले देख कर…

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“One dream it was…” by Mohit Sharma

A mask of a mask , a face of a face An angel dancing with the demon’s grace On the song of god , sung by sinners Chasing the losers , denying the winners Aah ! you wonderful face of pride You fighter unknown , you wings of flight Betray ! Betray ! This world insane , Let’s restart this senseless game……! Mohit Sharma One dream it was… just a little dream Of having a…

"“One dream it was…” by Mohit Sharma"

Kingfisher And Wild life Photography

एक दिलचस्प वाक़िआ- __________________ किंगफ़िशर नाम की इस चिड़िया का यह परफ़ेक्ट शॉट लिया है वाइल्ड लाइफ़ फोटो ग्राफर ‘एलन मॅक फ़ेडिन’ ने. जी किंगफ़िशर वही किंगफ़िशर जिसकी तस्वीर आपने बियर की बोतल और हवाई जहाज़ में बनी देखी होगी. वही किंगफ़िशर जिसका मालिक देश को चकमा देकर लगभग नौ हज़ार करोड़ रुपये लूट के भाग गया. दरअस्ल ये चिड़िया भी विजय माल्या की ही तरह चालाक और शातिर है. किंगफ़िशर लगभग गोली की रफ़्तार…

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रंजिश नहीं है होली (राहुल मिश्रा)

रंजिश नहीं है होली (राहुल मिश्रा) उम्र तकरीबन दस साल रही होगी. आज ही की तरह होली का दिन था. मेरे मोहल्ले के एक लड़के ने मेरे मूँह पे रंग भरा गुब्बारा फोड़ दिया. “फ़चाक” की आवाज़ के साथ ही वहाँ खड़ा हर कोई ठहाके मार कर मुझपे हँसने लगा. उसका ये मज़ाक मुझे पसंद नहीं आया और मैंने उसको एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया. चार घंटे बाद ही वह अपने भाई को ले…

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“इकतरफ़ा रिश्ते” + “जिसकी दुनिया है” (मीरा श्रीवास्तव)

“जिसकी दुनिया है” भगवान तेरी इस दुनिया में क्यूं दिल ठुकराये जाते हैं क्यूं चाहने वालों के अरमां मिट्टी में मिलाये जाते हैं दोलत शोहरत के रिश्ते नाते बाकी सब दफ़न कर दिये जाते हैं मतलब के सब रिश्ते नाते बाकी सब छोड़ दिये जाते हैं होती है बुराई की पूजा इस तेरी अंधी दुनिया में बाकी ‌हर इन्सान आंसू की तरह मिट्टी में मिलाये जाते है जीवन बगिया के मालिक तेरी इस दुनिया की…

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“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)

दरअसल बात उन दिनों की है , जब मैं भी सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के अग्निकुण्ड में गोते लगा रहा था | एक बार पुनः उसी सिलसिले मैं इंदौर की ओर रवाना हुआ लेकिन इस बार का सफ़र यादगार रहेगा इस बात का अंदाज़ा तो नही था। खैर वही हर बार की तरह मेरा कहना कि , ” कल देखा किसने” सो मैं भी बस मस्ताना सा चल दिया । लेकिन समस्या यह थी की…

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गर तुम पढ़ लेती

बात बेबात ऐसे न सताओ उनको जख्म दो पर ऐसे न भुलाओ उनको ये जो आखों में रखे है मोती थोड़े ये अमानत है ऐसे न लुटाओ उनको बातो बातो मे ऐसे न बहलाओ उनको जरा सी बात है थोड़ा सा मनाओ उनको वो मान जाएगें ऐसी तो कोई बात नही ये तो अपने है ऐसे न रूलाओ उनको – आशुतोष पाण्डेय शब्द सा तुम बनी, अर्थ मै हो गया। आत्मा तुम बनी, देह मै…

"गर तुम पढ़ लेती"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

“जल का तांडव”- मनोगुरू

“जल का तांडव” सैलाब के सितम ने देखो , आशियानों को डुबाया है…. जी रहे परिवार कोे संग , जीते जी ही बहाया है….. आपदा का स्वरूप धर यूँ , जल ने तांडव दिखाया है…… अब कष्टरूपी बारिश में देखो, जीवन कैसे नहाया है….. तन,धन,जन,अन्न भी , जल की जलन ने जलाया है…. खुशनुमा था हाल सबका , उनको भूखा रुलाया है …. सैलाब के सितम ने देखो , अरमानों को ढहाया है , बैर…

"“जल का तांडव”- मनोगुरू"

“तेरा ना होना बेहतर है” – मनोगुरु

वो थी तब खुश था वो थी तब खुश था, जो अब नाखुश है…. .वो थी सब कुछ था, जो अब ना कुछ है…. .‘वो’ और ‘मैं’ तब “हम” थे , जो अब ना हम हैं… .वो थी गम कम थे , जो अब गम नम हैं…. वो साथ थी , तब दम था… जो बात भी , अब कम है.. .बेशक दूरियाँ हैं , औ गम हैं पर आज भी हम , “हम” हैं……

"“तेरा ना होना बेहतर है” – मनोगुरु"