ज़िन्दगी

कल एक झलक देखी ज़िन्दगी की ,वो मेरी राहों में गुनगुना रही थी । फिर ढूँढा उसे दर-बदर , वो आँख-मिचौली कर मुस्करा रही थी । एक अरसे बाद आया मुझे करार , वो सहलाकर मुझे सुला रही थी ।हम दोनों क्यूँ है खफा एक दूजे से , मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी । मैंने पूछ लिया कि ,”क्यूँ दर्द दिया ज़ालिम तूने “? वो बोली , ” कि मैं ‘ज़िन्दगी’ हूँ…

"ज़िन्दगी"

“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू

गिन मत कदम मंजिल से पहले, वो खुद शुमार होंगे तेरी जश्न-ए-फतह में…. -अभिषेक “मनोगुरू” Collab with = Shiwam pathaur + Sharda Khakre + मनोगुरू (Dark Days Diary)…… on your quote app. वो चिराग दीपक समझ , बुझता सा दिख रहा है पर वो सिरफिरा बेफिक्र हो, तकदीर लिख रहा है… अभिषेक “मनोगुरू” थी हमारी भी तमन्ना आसमान छूने की, पर काट लोगों ने ज़मीन में दफ़नाया अतुल हिन्दुस्तानी जो कर प्रयास बेधुंध आसमां छू…

"“जिद जुनून जीत” — मनोगुरू"