Value of Beauty

सुंदरता का मूल्य। ===========अति सुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं। उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है। महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई। वह ‘सुंदर’ महिला एयरहोस्टेस से बोली “मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी। क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों…

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“The Battle” – Devansh Arora

“The Battle” – Devansh Arora The sun was up, She looked so messed up. Yet so beautiful to him, He looked deep into those eyes as if in those, he wanted to swim. She just nonchalantly smiled while they wished each other morning, None of them even had a clue what new storm was aborning. Like every usual day they started to get ready for work, They have fought many battles to be together but…

"“The Battle” – Devansh Arora"

धर्म के नाम पर गुमराह – (मानस कुमार देव)-

– मानस कुमार देव –   बेखबर कब तक रहोगे जमाने से, खुद में ही ऐसे कब तक सिमटे रहोगे, खिड़कियां-दरवाजे खोलकर तो देखो, तेरे दर पर भी दस्तक दे रहा है धुआं, कब तलक खुद को छिपाये रखोगे, जंजीर गुलामी की बढ़ती जा रही है, इस बात को कब तलक समझ जाओगे, द्वेष जो फैलाया जा रहा धर्म पर, कब तलक आँखें बन्द करके चलते रहोगे, गर अभी समझ जाते हो सारी बातें, जान…

"धर्म के नाम पर गुमराह – (मानस कुमार देव)-"

“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)

दरअसल बात उन दिनों की है , जब मैं भी सरकारी नौकरी की परीक्षाओं के अग्निकुण्ड में गोते लगा रहा था | एक बार पुनः उसी सिलसिले मैं इंदौर की ओर रवाना हुआ लेकिन इस बार का सफ़र यादगार रहेगा इस बात का अंदाज़ा तो नही था। खैर वही हर बार की तरह मेरा कहना कि , ” कल देखा किसने” सो मैं भी बस मस्ताना सा चल दिया । लेकिन समस्या यह थी की…

"“मेरी इंदौर यात्रा” भाग-१ (मनोगुरु)"

गर तुम पढ़ लेती

बात बेबात ऐसे न सताओ उनको जख्म दो पर ऐसे न भुलाओ उनको ये जो आखों में रखे है मोती थोड़े ये अमानत है ऐसे न लुटाओ उनको बातो बातो मे ऐसे न बहलाओ उनको जरा सी बात है थोड़ा सा मनाओ उनको वो मान जाएगें ऐसी तो कोई बात नही ये तो अपने है ऐसे न रूलाओ उनको – आशुतोष पाण्डेय शब्द सा तुम बनी, अर्थ मै हो गया। आत्मा तुम बनी, देह मै…

"गर तुम पढ़ लेती"

“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)

आज आख़री दफ़ा तन्हा हुवे हैं हम, पहली दफ़ा ग़ालिब समझ मे आये। ……..राहुल कुमार लिए हस्ती अपनी जब गुमनाम से मिलते हैं, अब मेरे लोग भी मुझको तेरे नाम से मिलते है। मग़रूर हो तुम भी तो हमे भी कोई जल्दी नही, चलो तो फिर तुमसे कभी आराम से मिलते हैं। …….राहुल कुमार रफ़ीक सारे अपने दुनिया-दारी में लगे हैं, हम बेवक़्क़त अब भी शायरी में लगे हैं। आफ़ताब को पहली दफ़ा सक हुवा…

"“वो गज़ल और हम”- राहुल कुमार (लेखक)"

“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू

1.↓ “वो बे-परवाह शख्स” ↓ जूझ बैठा आज मन , बस ख्वाब में उस शख्स से पूछ बैठा आज सुन , शीशे में अपने अश्क से…. बेवक्त ही क्या वक्त माँगा …? सिरफिरे कम्बख्त ने…… वक्त था पर ना दिया, उस दिल-ए-सख्त ने…… वक्त भी बे-वक्त बोला, माँगा ही क्यूँ उस शख्स से…? सख्त था जो ना दिया, उस दिल-ए-कम्बख्त ने…… सूझ बैठा आज क्यूँ , जूझने को अश्क से पूछ बैठा आज क्यूँ ,…

"“वो बे-गुनाह थी”- मनोगुरू"

“काश कोई सुन लेता” part2 — मनोगुरू

कोई कह दो ना कि रहने भी दो अब , भला मेरा क्या कसूर। शायद यही कि ल़ड़की हूँ फिर भी बस करो बेहद दर्द हो रहा है तुम्हारे नुकीले बेरहम औजारों से । माना कि अभी इस लायक नहीं हुई कि अपनी कराहती और बिलखती आवाज को आपकी बे-रहम , बेदर्द भावनाओं को सुना सकूँ मगर तुम सब तो बाहर की दुनिया में हो क्या कभी कोई चोट लगी या कटे नहीं हो जो…

"“काश कोई सुन लेता” part2 — मनोगुरू"