Sakshi Chauhan

दो वक़्त का खाना जुटाना जिनके लिए बड़ा मुश्किल होता है… चाहे जितनी कड़ी धूप हो या ठिठुरती ठंड, उनके पास रहने को घर कहाँ होता है… सपने तो ढेरों, आँखों मैं उनकी भी होते हैं, पर साकार करने का साधन , उनके पास कहाँ होता है… अपने बच्चों को अफ़सर बनाना वो भी चाहता है, पर उसका ये सपना सिर्फ़ सपना बनकर रह जाता है… कभी ढाबे में काम कर , कभी बड़े घरों…

"Sakshi Chauhan"

Happy Mothers Day (Juhi Singh Chauhan)

वो बड़े प्यार से नौ महीने अपनी कोख में तुझे रखती है वो एक मां है जो हजार दर्द सह कर भी तुझे पैदा करती है। जब तुम चलना भी नहीं जानते थे तो तुम्हारे डगमगाते कदमों से कदम मिला कर चलती है  वो एक मां है जो तुम्हे इस जमीन पर सीधा खड़ा होना सिखाती है। एक हल्की सी खरोंच पर भी तुम्हारी जो तड़प सी उठती है वो एक मां है जो तुम्हारे…

"Happy Mothers Day (Juhi Singh Chauhan)"

Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)

Harshit kushwaha जब उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मैं अपने शहर से दूसरे शहर गया था। जहां पर मुझे कॉलेज के छात्रावास में ही रहना पड़ता था।  बात उस वक्त की है जब मैं दिसंबर के महीने में भयंकर ठंड पड़ने के कारण रात के तकरीबन 2 बजे मुझे बहुत तेज बुखार था।हालांकि जवानी के सारे अच्छे दोस्त मेरे करीब ही थे । पर फिर भी दोस्त सिर्फ दोस्त ही होते हैं।  उस वक्त…

"Happy Mothers Day (Harshit Kushwaha)"

Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)

एक कविता माँ को समर्पित, छात्रावासियों को समर्पित। माँ मुझे तेरी याद आती है।  जिन्दगी जब भी सताती है। माँ मुझे तेरी याद आती है। भूख हद से मचल जाती है, जब रसोई में उंगली जल जाती है, तू फूँक को कैसे मरहम बनाती है,  माँ मुझे तेरी याद आती है। रात किताबों में जब ढल जाती है, नींद आँख में ही जल जाती है।  कोई माँ जब कहीं लोरी सुनाती है, माँ मुझे तेरी…

"Rohit Rathore (Winner of H.M.D.)"

Juhi Singh Chauhan

सिर से लेके पांव तक बस तुझसे बंधी हूँ मैं, कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं… यूं तो रीति रिवाज में ज्यादा नहीं पड़ती पर बात तेरी लम्बी उम्र की है इसलिए माथे पर अपने ये लाल रंग बड़े प्यार से सजाती हूँ मैं कि तू अब तो कह दे कि हा बस तेरी हूँ मैं नहीं फर्क पड़ता मुझे गर हाथो में चूड़ियां ना पहनूँ मैं पर बात…

"Juhi Singh Chauhan"

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan

ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! मंदिर जैसी पवित्र जगह को अपने इरादे की तरह नापाक कर दिया !! क्या तुम्हें पता भी तुम लोगो ने क्या पाप कर दिया !! एक बच्ची का इंसानियत से तुमने भरोसा उठा दिया !! हम सबका सिर शर्म से तुमने झुका दिया !! पापी बाहर घूम रहे सब कर रहे बस निंदा हैं ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! ऐ आसिफा जग…

"ऐ आसिफा जग शर्मिंदा है !! Mo. Arshan"

Guard of reservation

आरक्षण का पहरेदार… मुझे ‘दलित’ मत कहो, मैं भी इन्सान ही हूं, इस छूत-पात में मत दाबो, मैं भी ‘ब्राम्हण’ सा हकदार हूं। पर क्या हुआ ग़र, मैं बुध्दिमान हूं, मुझे तो ‘आरक्षण’ दिलाओ, मैं छोटी ज़ात का हूं। सुनो, मुझे ‘नीच- जा़त’ मत कहना, मैं भी बराबर का, ओहदेदार हूं। क्या हुआ अगर, मेरे पास बंँगला भी है, गाड़ी भी है, मुझे ‘अल्प – संख्यक’ ही रहने दो, मैं तो संविधान की दया का…

"Guard of reservation"

I have seen the Burning India.

“हिंदुस्तान जलते देखा है” कहीं दुकानें , कहीं कारे , कहीं मकान जलते देखा है।। मैंने इन दंगों में हिंदुस्तान जलते देखा है ।। कहीं थी आग की लपटें , कहीं धुँआ धुँआ हो रखा था ,, बिलखते भूखे बच्चों ने , राशन गोदाम जलते देखा है ।। हर तरफ आग का पहरा था ,, हर तरफ खून के छिटे थे ,, मैने इंसानों की बस्ती को कब्रिस्तान बनते देखा है ,, कोई था खून…

"I have seen the Burning India."

Pratibha is Alive by manoguru

हर रोज की तरह आज भी दिन ही था रात के 12 बज़कर 51 मिनट पर भी, अरे इक अरसा बीत गया है मनोगुरु ने रात और दिन में फ़र्क नहीं समझा | वजह…? वजह यह है कि सुना है कभी – ” जब आप सो रहे होते हो तब भी कोई जाग रहा होता है और जब आप जागॉगे तो वो आप से कहीं गुना आगे होगा” | बस अब यही याद रख कर…

"Pratibha is Alive by manoguru"